बच्चों के शरीर पर चकत्ते, मुंह में छालों से बुरा हाल
हापुड़। अस्पतालों में बीमार बच्चों की भरमार है, शरीर पर लाल चकत्ते और मुंह में छालों समस्या बन रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 120 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। आयुर्वेदिक अस्पतालों में भी ऐसे बच्चों की संख्या दो गुना तक बढ़ गई है। एक से दूसरे बच्चों में यह तेजी से फैल रही है, बरसात के बाद से बीमारी गंभीर हो गई है।
वैद्य धनवंतरि त्यागी ने बताया कि बच्चों में यह पित्त, रक्त की दुष्टि से होने वाला रोग है, जिसमें बुखार काफी तेज होता है। लाल लाल बिंदु जैसे चकत्ते शुरू होते हैं जो कि पैरों में सबसे पहले दिखाई देते हैं व 2 से 3 दिन में टांगों, हाथों में फैल जाते हैं और मुंह में छाले हो जाते हैं। बुखार, शरीर में दर्द, कभी कभी दस्त जैसे लक्षणों के साथ-साथ बच्चे खाना खाने में असहज अनुभव करता है। चकत्तों व मुंह के छालों से निकलने वाला विष छूने, साथ खाने, कपड़े तौलिया साझा करने से तेजी से दूसरे बच्चों को संक्रमित करता है।
फिजिशियन डॉ. हरिओम सिंह के अनुसार यह एक वायरस जनित रोग है, जो कि बहुत संक्रमण शील है। इससे बचाव के लिए हाथ धोने के तरीकों का प्रयोग करें, बच्चों को स्कूल से आने के बाद कपड़े बदलने, हाथ, मुंह धोने के बाद ही घर में कुछ छूने दें। बच्चों के टूथब्रश को कैप लगाकर रखें। यदि किसी बच्चे को इस रोग के लक्षण है, तो उसे स्कूल/ ट्यूशन आदि न भेजें। बच्चे को खट्टा, तीखा, बाजार का भोजन, छोंक युक्त भोजन से दूर रखें।
गढ़ रोड सीएचसी में शनिवार को इन रोगों से पीड़ित 70 बच्चे पहुंचे, जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में कुल 120 बच्चे पहुंचे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सचिन बंसल का कहना है कि इन रोग से पीड़ित बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं, बुखार भी परेशान कर रहा है। समय से उपचार पाने पर बीमारी आसानी से ठीक हो जाती है।
बच्चों को दिलाया जा रहा बेहतर उपचार
अस्पताल में आने वाले बच्चों को बेहतर उपचार दिलाया जा रहा है। अलग से वार्ड की व्यवस्था भी करायी गई है। बाल रोग विशेषज्ञ को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. दिनेश खत्री, सीएचसी अधीक्षक