हापुड़। जिले में चार एग्री गन्ना क्लीनिक खुलेंगे। जिन पर किसानों को फसल में लगने वाली बीमारी, ऊपज, नई प्रजातियों समेत कई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। मिट्टी जांच और बीज भूमि सोधन किसानों को सिखाया जाएगा। इस कवायद से किसान बाजारों में नकली कीटनाशकों पर होने वाले अनावश्यक खर्च से भी बच सकेंगे।
जिले में 38346 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की जाती है। गन्ना विभाग ने किसानों की समस्याओं एवं सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही गन्ना क्लीनिक चलाने का निर्णय लिया हे। क्लीनिक पर किसानों को गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के टिप्स दिए जाएंगे। इन पर गन्ना पर्यवेक्षक और सुपरवाइजर की तैनाती की गई है। ताकि वहां आने वाले किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके। गन्ना क्लीनिक पर किसानों को मृदा परीक्षण के बारे में भी बताया जाएगा। बीज एवं भूमि शोधन के लाभ, गन्ने की फसलों के रोगों की पहचान, लक्षण एवं कीटनाशक दवाओं के प्रयोग की जानकारी भी यहां किसानों को दी जाएगी। यही नही गन्ना क्लीनिक पर विभागीय योजनाओं, गन्ने की उन्नतशील प्रजाति, बीज उपलब्धता, गन्ने की खेती के लिए प्रचलित विधि आदि के बारे में भी जानकारी मुहैया कराई जाएगी।
यह है गन्ना क्लीनिक का उद्देश्य
गन्ना क्लीनिक का उद्देश्य निकटवर्ती केंद्र से गन्ना खेती में तकनीकी सुधार, उपज बढ़ाने में आने वाली कठिनाइयों के त्वरित समाधान एवं जागरूकता बढ़ाकर प्रति इकाई अधिक उपज बढ़ाने का लक्ष्य पूरा करना है। केंद्रों पर किसानों को गन्ने के रोग, कीटनाशक के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके लिए केंद्रों पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। गन्ना क्लीनिक पर पहुंचने वाले किसानों को ब्योरा रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
इन स्थानों पर बन रहे एग्री गन्ना क्लीनिक
जिले में सिंभावली चीनी मिल के गेट पर अ और ब नाम से दो क्लीनिक खुल रहे हैं। हापुड़ गन्ना समिति में एक क्लीनिक और ब्रजनाथपुर चीनी मिल के गेट पर एक एग्री गन्ना क्लीनिक खोला जाएगा।
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एग्री गन्ना क्लीनिक खुलने से किसानों को काफी लाभ होगा। जिन समस्याओं के निस्तारण के लिए किसान भटकते हैं अब आसानी से उनकी समस्याओं का निराकरण होगा। साथ ही गन्ने में लगने वाली बीमारी से बचाव होगा। नई प्रजातियों की जानकारी मिल सकेगी।-सना आफरीन खान, जिला गन्ना अधिकारी।