हापुड़। डेंगू के मरीजों को स्टेरॉयड देकर झोलाछाप और कुछ निजी अस्पताल खतरे में डाल रहे हैं। ऐसे पांच मरीजों में रक्तस्त्राव के मामले सामने आए हैं। जिसके बाद हेल्थ सुपरवाइजरों को निगरानी के आदेश दिए हैं। डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब आशाएं घर-घर जाकर मरीजों को चिन्हित कर उनकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देंगी।
सीएचसी के अधीक्षक डॉ.दिनेश खत्री ने बताया कि डेंगू बुखार के मरीज को स्टेरॉयड की जरूरत नहीं होती है। सामान्य दवाओं से ही बीमारी ठीक हो जाती है। लेकिन कई मरीजों में देखा गया है कि गांव, शहर में झोलाछापों ने डेंगू के मरीजों को स्टेरॉयड चढ़ा दिए। उच्च क्षमता की दवाओं के सेवन से मरीज ठीक होने की बजाए उनमें रक्तस्त्राव होने लगा। उन्होंने बताया कि हेल्थ सुपरवाइजरों को जिम्मेदारी दी गई है कि वह निजी अस्पतालों में जांच कर, डेंगू के मरीजों के दिए जाने वाले उपचार में शामिल दवाओं को परखें। यदि कोई स्टेरॉयड से उपचार करता मिलेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
डेंगू के मरीजों में इस तरह के लक्षण गंभीर-
* मरीजों में रक्तस्त्राव होना।
* फ्ल्यूड लॉस होना।
* लीवर, फेफड़ों, थर्ड स्पेस में पानी भरना।
* किडनी पर प्रतिकूल असर पडऩा।
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जिला अस्पताल से चार मरीज किए गए रेफर
जिला अस्पताल में अब तक 65 डेंगू के मरीज भर्ती किए गए हैं। इसमें चार मरीज अब तक रेफर किए जा चुके हैं, इन मरीजों में ब्लड प्लेटलेट्स 30 हजार से भी कम रह गई थी। सरकारी अस्पतालों में प्लेटलेट्स की व्यवस्था नहीं होने के कारण ही इन्हें रेफर किया गया।
तीन मरीजों में डेंगू की हुई पुष्टि
बृहस्पतिवार को जिले के तीन और मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनके साथ अब मरीजों की संख्या बढ़कर 118 पहुंच गई है। डीएमओ डॉ.सतेंद्र कुमार के नेतृत्व में टीम ने 65 स्थानों पर लार्वा तलाशकर, नष्ट कराया।
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आशाएं चिन्हित करेंगी मरीज
जिले में घर घर दस्तक देकर आशाएं बुखार के मरीजों को चिन्हित करेंगी। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देंगी। जिसके बाद टीम मरीज को आवश्यक दवाएं देगी, जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
कोट -बुखार के मरीज झोलाछापों के चक्कर में न पड़ें। चिकित्सक से परामर्श लेकर ही दवाओं का सेवन करें। सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं और इलाज की सुविधा है। - डॉ.सुनील त्यागी, सीएमओ।