हापुड़। चमरी निवासी नूतन प्रकाश त्यागी ने पुलिस महानिदेशक भ्रष्टाचार निवारण को पत्र भेजकर, कुछ भ्रष्ट अधिकारियों पर उत्पीड़न करने की शिकायत की है। साथ ही आत्महत्या की धमकी देते हुए मृत्यु की जांच ईमानदार अधिकारियों से कराने की मांग उठाई है।
नूतन प्रकाश त्यागी ने बताया कि भू-अर्जन विभाग गाजियाबाद द्वारा आनंद विहार योजना के लिए सन 2008 में उसकी भूमि का गलत तरीके से अर्जन किया गया है। इसका मुआवजा महज 800 रुपये प्रति वर्ग मीटर में दिया गया था। लेकिन प्राधिकरण की स्थापना से पहले इस खसरा नंबर पर पहले से ही दुकान बनाकर परिवार जीवन यापन कर रहा था। बिना करार किए ही उसका नाम भूलेख से हटा दिया गया। आरटीई के तहत उसके रकबे का मुआवजा 9 करोड़ 51 लाख रुपये बताया गया था, जो कि उसके दिए गए मुआवजे से काफी कम है। किसान ने बताया कि गत वर्ष 15 जून को एचपीडीए कार्यालय के बाहर धरने के दौरान उसे गाजियाबाद भू-अर्जन विभाग के कार्यालय से दो कर्मचारियों का फोन आया, जिन्होंने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया। वहीं प्राधिकरण के अधिकारियों ने भी यही कहा कि अगर वह आत्महत्या कर लेगा तभी शासन उसकी सुनवाई करेगा। एचपीडीए द्वारा एक समिति भी बनाई गई थी, जिसमें उसके प्रकरण को सुना जाना था लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। वर्ष 2016 में सड़क हादसे में गंभीर घायल होने का कारण भी प्राधिकरण के अधिकारी हैं। पीड़ित किसान ने बताया कि प्राधिकरण में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, उसका लगातार उत्पीडऩ किया जा रहा है। पीडि़त ने पुलिस महानिदेशक भ्रष्टाचार निवारण को पत्र भेजकर आत्महत्या की धमकी देकर मृत्यु की जांच ईमानदार अधिकारी से कराने की मांग उठाई है। वहीं उत्तर प्रदेश मानवाधिकार की तरफ से गाजियाबाद के जिलाधिकारी को इस मामले में जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए गए हैं।