हापुड़। शहर के ई-रक्शों के बेतरतीब संचालन से यातायात व्यवस्थाएं ध्वस्त हो रही हैं। पिछले पांच सालों की बात करें तो सड़कों पर इनकी संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है। बिना तय रूट पर दौड़ने के कारण ये ई-रिक्शा जाम का कारण बन रहे हैं। इसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों पर ई-रिक्शों का संचालन पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। एक आसान कार्य होने के कारण मजदूर वर्ग से जुड़े काफी लोग इस पेशे में आ गए हैं और अपनी आजीविका कमाने के लिए सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे सड़कों पर ई-रिक्शों की अधिकता हो गई है। ई-रिक्शा चालकों और अधिकारियों की माने तो जिले में करीब 15 हजार ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें हापुड़ शहर में इनकी संख्या सबसे अधिक है। हालांकि अधिकतर ई-रिक्शों का पंजीकरण नहीं हुआ है। जिनका पंजीकरण हुआ है, उस हिसाब से भी हापुड़ जिले में पिछले पांच सालों में इनकी संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है। वर्ष 2019 तक इनकी संख्या 1755 थी, जबकि अब जिले में 4003 ई रिक्शे पंजीकृत हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। एआरटीओ कार्यालय में प्रतिदिन चार से पांच रिक्शाओं का पंजीकरण हो रहा है।
तय रूटों से अलग चल रहे ई-रिक्शा -
शहर में जाम की व्यवस्था में सुधार हो सके, इसके लिए लोगों की मांग पर पुलिस ने ई-रिक्शों के रूट निर्धारित किए थे। लेकिन कुछ दिन व्यवस्थित तरीके से चलने के बाद अब ई-रिक्शे मनमाने रूप से सड़कों पर दौड़ रही है। जिसके कारण चौराहों पर जाम की स्थिति रहती है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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यातायात सीओ वरुण मिश्रा का कहना है कि ई-रिक्शा शहर में व्यवस्थित तरीके से चलें इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। रिक्शाओं के पंजीकरण के लिए भी पूर्व में सख्ती की गई थी। यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।
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