थानेदारों को अब अपराध रजिस्टर उठाकर क्राइम नंबर, क्राइम नेचर और समय देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दरअसल, वेब बेस्ड क्राइम मेपिंग सिस्टम के द्वारा तीन वर्ष का अपराध डिजिटल नक्शे में अपलोड किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुलिस को इसका लाभ बड़ी घटनाओं के खुलासे में मिलेगा।
अमूमन पुलिस अधिकारियों की एक ही स्थान पर तैनाती अधिक समय तक नहीं रहती है। थानों में तैनात पुलिसकर्मी स्थानांतरित होते रहते हैं। पुलिस का मानना है कि इस वजह से अपराधियों पर अंकुश नहीं लग पाता है।
नई तैनाती के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों को पिछले अपराध के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। किसी घ्ज्ञटना या गिरोह के बारे में जानने के लिए अपराध रजिस्टर का अध्ययन करना पड़ता है। समय और स्टाफ की कमी के कारण पुलिस इतनी बारीकी से अध्ययन नहीं कर पाती है।
ऐसे में घटनाएं लगातार होती रहती हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब नए थानेदारों, सीओ या पुलिस कप्तान को जिले और अपने क्षेत्र में हर स्पाट पर होने वाले क्राइम नेचर को समझकर उसे रोकने और उसका डाटा बैंक बढ़ाने में आसानी हो जाएगी। पुलिस अब गूगल मैप पर क्राइम कंट्रोल करेगी।
पुलिस विभाग मैपिंग साफ्टवेयर डाटा अपलोड कर निर्धारित किए 16 श्रेणी के अपराध का पूरा डाटा फीड करने में जुटा है। इस सिस्टम के तहत थानों के तीन साल के क्राइम रिकार्ड को अपलोड किया जाएगा। सिस्टम के जरिये हर क्षेत्र में होने वाले क्राइम नेचर के समय, स्पॉट और हर महत्वपूर्ण जानकारी अपलोड होगी।
इसका डाटा बैंक होने से हरएक अधिकारी को अपने क्षेत्र की जानकारी चार्ज लेते ही पता चल जाएगी। एएसपी राममोहन सिंह ने बताया कि इस सिस्टम के तहत जिले के सभी थानों को डाटा जुटाया जाता है। इस स्थिति से अपराध को रोकने में काफी सहायता मिलेगी।