एसटीएफ ने भले ही एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में छापेमारी कर 37 अरब रुपये केेे गोलमाल का भंडाफोड़ कर दिया हो, लेकिन जिले में अब भी आधा दर्जन डिजिटल मार्केटिंग कंपनियां बेधड़क निवेशकों से क्लिक करा रही हैं।
हालांकि अचानक इन कंपनियों से जुड़े निवेशकों के खातों में भी पैसा आना बंद हो गया है। इससे निवेशकों की बेचैनी बढ़ गई है। आश्चर्य की बात यह है कि इन कंपनियों का पूरे जिले में कोई कार्यालय नहीं है। वहीं सोशल ट्रेड पर अब भी क्लिक आने से लोग हैरान हैं।
बीते छह महीने से जिले में डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों ने युवा और खासकर ग्रामीणों को चंद दिनों में लखपति बनने का सपना दिखा दिया था। हजारों की संख्या में लोगों ने लाखों रुपये इन कंपनियों में निवेश कर दिया। रोजाना बैंक खाते में पैसा आने से निवेशक फूले नहीं समा रहे थे। खासकर सोशल ट्रेड से जिले के अधिकांश लोग जुड़े हुए थे।
इसी दौरान बीते दो महीनों में करीब आधा दर्जन अन्य डिजिटल कंपनियों ने भी जिले में तेजी से जाल बिछाया है। लोगों को प्रति क्लिक दस रुपये तक देने का सपना दिखा, इन कंपनियों ने ग्रामीण क्षेत्र में सैकड़ों लोगों को अपने जाल में फांस लिया है।
एसटीएफ की इस कार्रवाई से अन्य कंपनियों से जुड़े लोग अब अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। शहर में बिजली निगम कार्यालय, बीएसए और पुलिस कार्यालय में कार्यरत अनेक लोग इस जाल में फंसे हैं, जो अब काफी बेचैन हैं।
सोशल ट्रेड पर एसटीएम की छापेमारी के बाद से इन कंपनियों से जुड़े लोगों के खाते में भी पैसा नहीं आ रहा है। वहीं सोशल ट्रेड से जुड़े हजारों लोगों का तो बुरा हाल है।
इन दिनों जिले में वेब फॉर यू, एडमिन, मायाज, गो नेक्सट सहित आधा दर्जन डिजिटल मार्केटिंग कंपनियां सक्रिय हैं।
डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के जाल में फंसने से सरकारी कर्मचारी भी अछूते नहीं रहे हैं। अधिकांश सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारियों ने इन कंपनियों में पैसा लगाया हुआ है। शुक्रवार को मुख्य कार्यालयों में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई थी। शहर में बिजली निगम कार्यालय, बीएसए कार्यालय में कार्यरत अनेक लोग इस जाल में फंसे हैं।
डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों के आकर्षक प्लान की चकाचौंध से पुलिस कर्मी भी अछूते नहीं रहे। जिले के विभिन्न थानों में तैनात अनेक पुलिस कर्मियों ने भी इस कंपनी से जुड़कर लाखों रुपये कमाने का सपना देख लिया। हालांकि इस घपले का भंडाफोड़ होने पर उक्त पुलिस कर्मी अब सफाई देने में लगे हैं कि उन्होंने कोई पैसा नहीं लगाया।
डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के लुभावने प्लान में फंस चुके निवेशक अब इस असमंजस में डूबे हुए हैं कि वह अपना पैसा कैसे निकालें। कई निवेशक तो अधिवक्ताओं से भी सलाह ले रहे हैं।