संवाद न्यूज एजेंसी
पिलखुवा। रामा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल द्वारा बिना मान्यता प्रक्रिया पूरी किये एमएस और एमडी के छात्रों को प्रवेश देने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इधर विश्वविद्यायल ने आगामी दो माह में छात्रों की परीक्षाएं कराने का आश्वासन दिया है। जिसके बाद छात्रों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की है। जिसके बाद से कॉलेज प्रशासन ने राहत से सांस ली है।
ज्ञात रहे कि एनएच-9 किनारे स्थित रामा मेडिकल कॉलेज ने वर्ष 2020-21 में एमडी और एमएस की संबद्धता के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यायल मेरठ में आवेदन किया था। जिसके उपरांत कॉलेज ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में आवेदन किया, और नीट के माध्यम से छात्रों को प्रवेश दिए गए। जिस पर विश्वविद्यालय ने बिना नैक मूल्यांकन के संबद्धता देने की आपत्ति लगा दी। इसके उपरांत दिसंबर 2021 में कॉलेज ने नैक मूल्यांकन कराया। लेकिन कॉलेज द्वारा इसकी सूचना अर्थात जानकारी विश्वविद्यालय को नहीं दी गई। प्रवेश पाए छात्रों को परीक्षा फार्म भरने के दौरान पता चला कि कॉलेज को अभी तक विश्वविद्यायल से संबद्धता ही नहीं मिली है। जिसके चलते विश्वविद्यालय ने कॉलेज पर लापरवाही बरने और बिना मान्यता प्रक्रिया पूरी किये छात्रोंं का प्रवेश लेने पर 25 लाख रूपये का जुर्माना लगाते छात्रों की परीक्षाएं को हटा दिया। इसी से गुस्साए मेडिकल के छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल को पिछले एक सप्ताह से बंद कर धरनारत थे। छात्रों ने बताया कि मामले का हाईकेर्ट में वाद दायर किया गया है। इधर विश्वविद्यायल ने भी आगामी दो माह में छात्रों को परीक्षाएं कराने का आश्वासन दिया है जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया है।
कोट-पिछले एक सप्ताह से कॉलेज परिसर में धरनारत मेडिकल के छात्रों द्वारा बुधवार को धरना समाप्त कर दिया है। छात्रों से वार्ता की जारी है, सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। आकाश सिसोदिया, प्रबंधक, रामा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल।