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Hapur News: 23 साल बाद गढ़ में दोबारा खिला कमल

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गढ़मुक्तेश्वर। 23 साल पहले वर्ष 2000 में हुए निकाय चुनाव में पहली बार भाजपा के रामौतार राजौरा ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन उसके बाद से पालिका में कमल नहीं खिल सका। वर्ष 2000 में पहली बार ही निकाय चुनाव पार्टी के चिन्ह पर कराए गए थे।
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वर्ष 2000 में पार्टी सिंबल पर हुए निकाय चुनाव में प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर भाजपा से रामौतार राजौरा, समाजवादी पार्टी से सोना सिंह और कैलाश चन्द टाल वाले निर्दलीय प्रत्याशी थे। तीनों के बीच कड़ा मुकाबला रहा। पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों की नगरपालिका में 27 हजार मतदाता शामिल थे। जिसमें रामौतार राजौरा ने कैलाशचंद को पराजित किया। उन्होंने 1278 मतों से जीत दर्ज कर नगर में भाजपा की सरकार बनाई थी।
वर्ष 2006 में हुए निकाय चुनाव में एक बार फिर गढ़ पालिका चेयरमैन सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गई, जिसमें समाजवादी पार्टी के चिन्ह पर चुनाव लड़कर सोना सिंह चेयरमैन बने। वहीं 2012 में अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़कर संगीता पुरुषोत्तम ने जीत दर्ज की। वहीं 2017 में सामान्य सीट पर भी बहुजन समाज पार्टी प्रत्याशी सोना सिंह ने भाजपा के विजय शर्मा को हराकर चेयरमैन बने। 2000 में जीतने के 23 साल बाद एक बार फिर राकेश बजरंगी ने नगर में कमल खिलाया है। जिससे सभी भाजपाइयों में खुशी की लहर है। (संवाद)
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