गढ़मुक्तेश्वर। ब्रिटिश शासनकाल में इस मेले के मद्देनजर नैरो गेज की स्पेशल ट्रेन चलती थी। यह तब की बात है जब नेशनल हाईवे-24 नहीं बना था। इसमें केवल गढ़ खादर मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालु ही सफर करते थे। करीब 7 दशक पूर्व तक यह ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरकर गढ़ से दिल्ली के बीच चलती थी। स्पेशल ट्रेन सेवा के लिए गढ़ स्टेशन से नैरो गेज वाली अलग लाइन बिछाई हुई थी। आजादी के बाद गंगा नदी पर सड़क पुल का निर्माण हुआ और आवागमन के साधन बढ़े तो स्पेशल ट्रेन सेवा बंद हो गई। विभागीय अफसरों की लापरवाही और उचित देखरेख के अभाव में लाइन तो खुर्दबुर्द हो चुकी है। रेलवे की भूमि पर कहीं फसल लहलहा रही हैं, तो कहीं पक्के मकान बन चुके हैं। रेलवे अधिकारियों ने कई बार नोटिस भेजकर लाइन वाली भूमि से कब्जे हटाने की चेतावनी दी है, परंतु नतीजा हर बार शून्य ही रहा।