हमीरपुर। कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर स्थित यमुना नदी के पुल की कोठी 10 व 11 के बीच स्लैब क्षतिग्रस्त होने पर रविवार को ओवरलोड वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया। हाइवे की देखरेख के साथ टोल टैक्स वसूल रही पीएनसी कंपनी के अधिकारियों ने डैमेज पुल की मरम्मत कराने के लिए टीम बुलाई है। ओवरलोड के चलते पुल सातवीं बार क्षतिग्रस्त हुआ है।
कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित यमुना ब्रिज जर्जर हालत में है। बीते 2009 से अब तक सात बार क्षतिग्रस्त हुआ है। रविवार को मुख्यालय की ओर से कोठी 10 व 11 की स्लैब क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन ने ओवरलोड वाहनों को रोकने के लिए टीमें लगा दी। अभी आवागमन सामान्य रूप से जारी है। पीएनसी के प्रोजेक्ट मैनेजर एमपी वर्मा ने बताया कि पुल की स्लैब में हमीरपुर से कानपुर की ओर दरारें आई है। जिसकी मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है।
1976 में 30 जून को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने यमुना नदी के पुल को जनता के सुपुर्द किया था। वर्ष 2009 में 14 जून को रात करीब 11 बजे कानपुर की ओर से पुल की कोठी नंबर पांच धंस गई। 10 जून 2011 की सुबह 5:30 बजे पुल फिर क्षतिग्रस्त हुआ। तीसरी बार शुक्रवार 21 जून 2013 को रात नौ बजे हमीरपुर की ओर से कोठी नंबर एक की बीम दरकने के साथ स्लैब धंस गई। चौथी बार 29 अक्तूबर 2014 की रात में पुल क्षतिग्रस्त होने से आवागमन थम गया। पांचवीं बार 19 जून 2015 को पुल क्षतिग्रस्त होने पर आवागमन रूका। रविवार को दोपहर करीब दो बजे कोठी नंबर दो की स्लैब में दरार आने से आवागमन रोका गया है। छठवीं बार 19 जून 2016 को पुल की कोठी नंबर दो में स्लैब क्षतिग्रस्त हुई। सातवीं बार शनिवार को पीएनसी व एनएचआई के अधिकारियों ने तकनीकी जांच में दरारें आने की जानकारी दी।