हमीरपुर। महिला जज से छेड़खानी के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद फैसला एक वर्ष के अंदर सुनाया गया है। हालांकि इसे लटकाने को आरोपी द्वारा कई हथकंडे अपनाए गए। लेकिन अभियोजन की पैरवी के चलते फैसला जल्द सुनाया जा सका।
जिले से सात जून को स्थानांतरित हुए मामले की पैरवी करने वाले अभियोजन अधिकारी नित्यानंद यादव ने बताया कि मामले के आरोपी मोहम्मद हारून को मुकदमा दर्ज होने के बाद जेल भेज दिया गया। जिसके बाद उसे 13 मार्च 2023 में हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। साथ ही हाईकोर्ट ने चार माह में ट्रायल पूरा करने के आदेश दिए। जिस पर मामले में पैरवी तेज कर दी गई। लेकिन आरोपी द्वारा जिरह बीच में बंद कर देना और अगली तारीख में जिरह न करने के प्रयास कराए गए। ताकि सुनवाई जल्द न हो। लेकिन ऐसे में अदालत ने सख्ती दिखाते हुए अधिक समय होने के चलते जिरह का अंतिम मौका दिया गया। इसके अलावा आरोपी द्वारा हाईकोर्ट में मामला अन्य जनपद में स्थानांतरित करने का भी प्रार्थना पत्र दिया गया। जिसे न्यायालय ने तीन फरवरी 2023 को खारिज कर दिया। बताया कि वह स्थानांतरण से पूर्व मामले की बहस पूरी करा चुके थे। मौजूदा अभियोजन अधिकारी पवन बाजपेयी ने बताया कि अदालत ने मंगलवार को फैसला सुना अधिवक्ता मोहम्मद हारून को दोषी मान चार वर्ष का कारावास सुनाया है।