राठ/ मौदहा। अन्नदाता की मुसीबतों का अंत कहीं नजर नहीं आ रहा है। नहरों में पानी आने के इंतजार में बुवाई देरी से हुई, अब खाद के लिए किसान अपने सभी काम छोड़ कर समितियों की लाइन में लग रहे हैं। छह घंटे लाइन की धक्कामुक्की के बावजूद कई किसानों टोकन ही नहीं मिला। दिन भर की मारामारी के बाद मात्र दो बोरी खाद मिली। देर शाम सैकड़ों किसान मायूस होकर लौट गए।
फसलों के पोषण के लिए यूरिया की जरूरत होती है। समितियों में यूरिया की बोरी 280 रुपये में दी जाती है। जबकि खुले बाजार में 350-400 रुपये तक है। नगर में क्रय विक्रय, पीसीएफ व क्षेत्रीय सहकारी समिति से किसानों को खाद बांट रहीं है। यह समितियां किसानों की खाद की जरूरत पूरी करने में नाकाम हैं।
मंगलवार सुबह क्रय विक्रय में खाद के लिए पांच सैकड़ा से अधिक किसान पहुंच गए। धक्कामुक्की होने पर पहुंची पुलिस ने लाइनें लगवाईं। स्थिति बेकाबू होने पर कोतवाली से और पुलिस फोर्स बुलाई गई। जिसके बाद टोकन बांटे जाने का काम शुरू हो पाया।
औंता के रमेश कुमार, मूलचंद्र, सहदेवी, रामअवतार, सचिन ने बताया सुबह नौ बजे से लाइन में लगे हैं। डेढ़ बजे टोकन बंटना बंद हो गए। उन्हें टोकन ही नहीं मिल पाए।
मौदहा संवाद के अनुसार यूरिया खाद के लिए पीसीएफ में किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। धक्का-मुक्की के बीच पुलिस की मौजूदगी में दो से तीन बोरी खाद ही प्रत्येक को मिल सकी। गोदाम प्रभारी सुरेंद्र कुशवाहा ने बताया कि खाद आने पर शेष किसानों को खाद दी जाएगी। लरौंद गांव के किसान जय करण प्रजापति ने बताया कि समितियों में खाद नहीं होने से निजी दुकानदार लाभ उठा रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई शिकायत
गहरौली। क्षेत्र के हुसैना गांव में यूरिया सरकारी दाम से 50 से 80 रुपये प्रति बोरी महंगे दामों में बेची जा रही है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत सीएम हेल्प लाइन में की है। मुस्करा के हुसैना गांव निवासी किसान असमंजय कुमार, सुधीर कुमार, राजकुमार, रामकुमार, गणेश शंकर आदि ने बताया कि गांव के खाद विक्रेता यूरिया खाद की बोरी मंहगे दामों में बेची जा रही है। 267 रुपये एमआरपी छपी है, लेकिन दुकान विक्रेता 320 रुपये प्रति बोरी बेच रहा है। किसानों ने निर्धारित मूल्य पर खाद दिलाए जाने की सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है। संवाद