हमीरपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि 2025 तक टीबी हारेगा और देश जीतेगा। अभियान चलाकर मरीजों को निशुल्क चिकित्सा और पोषण सामग्री के लिए हर माह धनराशि खाते में भेजी जाती है। जिले में अफसरों व नेताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मरीजों को गोद लिया है। पड़ताल की गई तो सामने आया कि मरीजों को गोद लेकर एक बार किट तो दे दी गई लेकिन पोषण किट देने की जहमत नहीं उठाई है। कागजों पर मरीजों को गोद लेकर अफसर व जनप्रतिनिधि उन्हें भूल गए। कुल 762 टीबी रोगी पंजीकृत हैं। इनमें 31 बच्चे, 477 पुरष व 254 महिलाएं हैं। वहीं बुधवार को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के आगमन को लेकर समूचा जिला प्रशासन उनकी आवभगत में व्यस्त दिखा। वहीं, क्षयरोगी इलाज के लिए घंटों चिकित्सकों का इंतजार करते रहे।
कुरारा निवासी मरीज कमलेश ने बताया कि भाजपा के जिला महामंत्री रामदास सुदर्शन ने उन्हें गोद लिया था। उनका इलाज चल रहा है। लेकिन, उसे राशन किट देने कोई नहीं आया है। न ही उसे कुछ मिला है। वहीं रामदास का कहना है कि मरीज सही हो गया है। इसके साथ ही कुरारा के बिलौटा गांव निवासी क्षयरोगी राजाबाई निषाद को भाजपा नेता व नगर पंचायत अध्यक्ष आशारानी कबीर ने गोद लिया था। बेटे लाखन निषाद ने बताया कि मां का इलाज चल रहा है। 500 रुपये प्रतिमाह आता है लेकिन राशन किट आज तक नहीं मिली है। वहीं, आशारानी कबीर का कहना है कि हाल में ही किट नहीं दी है।
सुमेरपुर क्षेत्र के पत्योरा गांव से आए क्षयरोगी दिनेश कुमार ने बताया कि दो माह से रोग से पीड़ित है। आज अस्पताल दिखाने आए थे चिकित्सक ही नहीं है। दवा तक नहीं दी जा रही है।
मौदहा से आई मरीज संगीता पत्नी मितेश कुमार ने बताया कि बांदा में हुई जांच में टीबी की पुष्टि हुई थी। आज जिला अस्पताल दिखाने आई तो यहां चिकित्सक ही नहीं है। न कोई कुछ सुनने को तैयार है। पिछले एक घंटे से इंतजार कर रही है।
टीबी मरीजों की खोज केे लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। पुष्टि होने के बाद उनका उपचार शुरु कर दिया जाता है। जो लोग गोद लेते हैं उनकी जिम्मेदारी है कि मरीज की निगरानी करें। अगर कोई ऐसा मरीज है तो उससे मामले की जानकारी की जायेगी।
- डॉ. बीपी सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी