भरुआ सुमेरपुर/ कुरारा। दो दिन मौसम साफ रहने के बाद सोमवार को फिर एक बार मौसम पलटने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। हवा में बार-बार हो रहा बदलाव फसलों की सेहत के लिए मुफीद नहीं है।
माघ मास के आखिरी पखवारे में हुई महावट के बाद किसानों के चेहरे खिल उठे थे। किसानों का मानना है कि माघ मास की महावट फसलों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। बारिश होने के दो दिन बाद सोमवार को मौसम अचानक बदल जाने से किसान थोड़ा चिंतित हुआ है। किसानों के अनुसार बारिश के बाद अब फसलों को धूप और पहुछा हवा की जरूरत है। बार-बार हवा में हो रहा बदलाव फसलों की सेहत के लिए ठीक नहीं है।
कृषि रक्षा इकाई के तकनीकी सहायक अजित शुक्ला ने बताया कि हवाओं का बदलाव फसलों में कीट व पतंगों को बढ़ावा देता है। बारिश के बाद फसलों में कीट पतंग कम हुआ था।
कुरारा संवाद के अनुसार पारा गांव में कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद सुरक्षा के अंतर्गत मटर फसल फील्ड डे के बारे में कृषि विज्ञान के मुस्तफा ने किसानों को जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. मुस्तफा ने बताया कि मटर की फसल में खरपतवार नष्ट करने के बाद फूल आने के पहले बहुछारी सिंचाई करें। इससे पैदावारी बढ़ेगी। चना व मसूर की फसल में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें। इससे फसल का कीटों से बचाव किया जा सके। कार्यक्रम में कृषि बीज भंडार के प्रभारी दिलीप कटियार, अनूप कुमार, बाबूराम, रणधीर सिंह, मोहन सिंह, रामसेवक व रूप सिंह मौजूद रहे।