भरुआ सुमेरपुर। विकास खंड के पच्चीस हजार की आबादी वाले ग्राम इंगोहटा में प्रवासियों को मिलाकर हजारों की संख्या में मजदूर हैं। उन्हें काम की तलाश भी है। लेकिन काम करने के बाद मजदूरी भुगतान में देरी होने के भय से वर्तमान में हो रहे चकमार्ग के निर्माण की खुदाई में काम नहीं कर रहे हैं। बड़ी जद्दोजहद के बाद बमुश्किल दो दर्जन मजदूर ही काम पर आ सके हैं। इंगोहटा के सुनीता, बरदानी, रामस्वरूप, भोला, तेजवा, कमलापत,रामबाबू आदि ने बताया कि उन्होंने गत वर्ष तालाब खुदाई, सड़क निर्माण व चकरोड निर्माण में खून पसीना बहाया था । जिसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। आरोप लगाया कि लगभग सत्तर मजदूरों का साढ़े चार लाख रुपये का भुगतान फंसा है और मजदूर दर-दर की ठोकरें खाते घूम रहे हैं। मजदूरों ने बताया कि सचिव व प्रधान से जब भी भुगतान की बात की जाती तो उन्हें आश्वासन दिया जाता है कि परेशान न हो पैसा मिल जाएगा। मजदूरों ने आरोप लगाया कि जाबकार्डों में गड़बड़ी कर हेराफेरी की गई है। तभी उनकी मजदूरी नहीं दी जा रही है। गौरतलब है कि वर्तमान समय में पंचायत रेलवे क्रॉसिंग के पास कच्ची सड़क का काम मनरेगा के तहत करा रही है। लेकिन भुगतान न मिलने के डर से गांव में हजारों की संख्या में मजदूर होने के बाद भी खुदाई के लिए सिर्फ दो दर्जन मजदूर ही पहुंच रहे हैं। एपीओ मनरेगा जितेंद्र कुमार ने बताया कि अगर मजदूरों का भुगतान रुका है तो वह प्रार्थना पत्र दे जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सचिव नितेश सिंह चंदेल ने बताया कि मजदूरों का भुगतान ऑन लाइन होता है और सीधे मजदूर के खाते में पहुंचता है। यह जरूर है कि कभी कभी देर से भुगतान हो पाता है। प्रधान शीतल प्रसाद कोरी ने बताया कि पंचायत चुनाव का वर्ष होने के कारण विरोधी बदनाम करने के लिए साजिश करते रहते हैं। उनके यहां किसी भी मजदूर का भुगतान नहीं फंसा है।