हमीरपुर। निकाय चुनाव के पहले जनपद आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तत्कालीन सीएमओ को निर्देशित कर जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती कराने का आदेश दिया था। आज तक जिला पुरुष व महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाएं निजी पैथालॉजी से महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड जांच कराने को मजबूर हैं। हालांकि, जिम्मेदारों का कहना है कि एक सोनोलॉजिस्ट की तैनाती हुई है। वह प्रशिक्षण करने गए है।
जिला अस्पताल में जनपद सहित आसपास के जनपदों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में समुचित इलाज न मिल पाने के चलते ज्यादातर मरीज मायूस लौट जाते हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते भी मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। 29 मार्च को जनपद आए डिप्टी सीएम ने तत्कालीन सीएमओ को हर हाल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए निर्देशित किया था। तैनाती होने तक महिलाओं की जांचे निजी केंद्रों से कराकर उसका भुगतान शासन से कराए जाने के फरमान जारी किए थे। चार माह गुजर जाने के बाद भी आदेश का पालन होता नहीं दिख रहा है। मंगलवार को जिला महिला अस्पताल की ओपीडी पहुंची 1098 महिलाओं का डॉ. साधना ने उपचारित किया गया।
मौदहा से आई मरीज पुष्पा ने बताया कि वह पांच माह की गर्भवती है। अल्ट्रासाउंड जांच न होने से निजी पैथाेलॉजी से 500 रुपया देकर जांच कराई है।
कानपुर जनपद के रामपुर गांव से आई चांदनी पत्नी हुसैन खां ने बताया कि एक चिकित्सक के सहारे ओपीडी चल रही है। घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड जांच भी बाहर से करानी पड़ती है।
समाजसेवी जलीस खां ने बताया कि 65 बेड के अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं आज भी बदहाल हैं। चिकित्सकों की भारी कमी है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से जिले की करीब 12 लाख आबादी को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
सोनोलॉजिस्ट की तैनाती हुई है। वह प्रशिक्षण लेने गोरखपुर गए हैं। जल्द ही अल्ट्रासाउंड की जांच शुरू कराई जाएगी। गर्भवती महिलाओं की जांचे बाहर से कराकर उसका भुगतान कराया जाता है। 30 बेड का अस्पताल है। शासन से पत्राचार कर बेड की संख्या व स्टाफ बढा़ए जाने की मांग की है।
डॉ. फौजिया अंजुम नोमानी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल