करीब दो वर्ष पूर्व कोतवाली क्षेत्र में एक गांव निवासी तीन साल की मासूम के साथ पारिवारिक दादा द्वारा दुराचार किए जाने के मामले में न्यायालय ने आरोपी को उम्र कैद और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थ दंड का आधा हिस्सा पीड़िता को देने के साथ शासन को पीड़िता की शारीरिक व
मानसिक क्षति व आवश्यक इलाज के लिए एक लाख रुपये दिलाने के निर्देश भी दिए हैं। सहायक शासकीय अधिवक्ता देवसिंह यादव ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में आठ अप्रैल 2015 की रात को करीब नौ बजे एक तीन साल की मासूम को उसका पारिवारिक दादा अपने साथ खेताें पर ले
गया और उसके साथ दुराचार किया। बताया कि घटना के दिन पीड़िता के मां-बाप खेतों पर कटाई करने गए थे। वे लोग रात 11 बजे घर वापस आए तो उन्हाेंने सोचा कि बच्चे बाबा के यहां सोने चले गए होंगे। दूसरे दिन गांव के ही एक व्यक्ति ने उसकी बेटी के गांव के बाहर बरदानी के खेतों में पडे़ होने की
सूचना दी। लड़की का पिता वहां पहुंचा तो देखा कि मासूम बेटी खून से लथपथ रो रही थी। पूछने पर उसने पारिवारिक दादा बृजपाल पर उसे रात में नौ बजे करीब खेतों में ले जाकर दुराचार करने की बात बताई। जिसकी रिपोर्ट पीड़िता के पिता ने कोतवाली में दर्ज कराई। साथ ही पीड़िता का इलाज कानपुर में
कराया। अधिवक्ता ने बताया कि उसकी हालत अभी भी गंभीर है। उसके पेट में शौच के लिए उपकरण डाला गया है। अब उसका दोबारा आपरेशन होना है। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश दीपा जैन ने आरोपी को आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही
उन्हाेंने अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को देने के निर्देश दिए है। वहीं शासन को भी पीड़िता के शारीरिक, मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए व भविष्य में इलाज के लिए एक लाख रुपये दिलाने का आदेश दिया है।