जनपद में कस्बे व उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में चंद्रावल नदी किनारे
ईंट उद्योग का अच्छा कारोबार है। चंद्रावल नदी किनारे डेढ़ दर्जन से अधिक
चिमनियां है। लेकिन इस वर्ष लगातार तीन बार मौसम की मार झेल रहे भट्ठा
मालिकों को एक करोड़ से अधिक रुपये की क्षति उठानी पड़ी है। इस बड़े
व्यापार के प्रभावित होने से ईंट के महंगी होने की संभावना है। इसका असर
विकास कार्यों के साथ आम आदमी पर भी पड़ेगा। ईंट भट्ठों में हुए नुकसान का
संवाददाता सलाहउद्दीन ने जायजा लिया। पेश है एक रिपोर्ट
15 लाख की हुई क्षति
छिरका
गांव में चंद्रावल नदी किनारे बाकर का भट्ठा है। यहां तैयार की गई ईंट
भारी बरसात से घुल चुकी है। भट्ठा मालिक ने बताया कि अकेले उनकी करीब 15
लाख की क्षति हुई है। काफी अर्से बाद तीन दिन पूर्व ही चिमनी में आग डाली
थी। लेकिन बारिश ने उनकी चिमनी ही ठंडी कर दी। कहते हैं कि कई जगह चिमनी
धंस चुकी है। जिसे मजदूर दुरुस्त करते मिले।
बरसात ने किया कबाड़ा
कमल
ईंट उद्योग नरायच के मालिक मनमोहन गुप्ता कहते है कि इस साल तो उनका
कबाड़ा हो गया है। वह टैक्स की अदायगी भी करते है। लेकिन बारिश के झटके ने
उनकी कमर तोड़ दी है। अब टैक्स कैसे अदा होगा और फिर से इसे संचालित होने
में टाइम लगेगा। कहते है यहां काम करने वाले हजारों मजदूर प्रभावित है।
लाखों की ईंट हुई तहस-नहस
चौधरी
कलीम का ईट भट्ठा गांव पढ़ोरी के निकट चंद्रावल नदी किनारे है। बताते है
कि उनका काम ठप हो गया है। कहते हैं कि ठेके पर ईंट तैयार कराई जाती है।
बरसात से लाखों ईंट तहस नहस हो गईं। इसमें लाखों रुपये की क्षति हुई है।
इसके साथ ही मजदूर परिवार की रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
बारिश ने बीते वर्ष भी किया था बर्बाद
भट्ठा
चिमनी संघ के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल का कहना है कि बारिश ने उन्हें बीते
वर्ष बर्बाद कर दिया था तब उत्पादन में भारी गिरावट आई थी। प्रत्येक भट्ठा
मालिक कई लाख के घाटे पर चले गए थे। अभी संभले भी नही थे और जैसे यह
कारोबार पुन: चालू किया। शुरूआती दौर में प्रत्येक भट्ठे में कच्ची ईंटें
लगी थी। किसी किसी चिमनी में आग भी डाल दी गई। बीते दिसंबर महीने में भी
बारिश शुरू हो गई थी। तब भी कच्ची ईट बर्बाद हो गई और जनवरी तक लगातार मौसम
की खराबी के चलते चिमनियां नहीं चल सकीं। मौसम ठीक होेते ही फिर बारिश
शुरू हुई। जिससे पकने के लिए लगी कर्च्ची इंटें ध्वस्त हो गईं और चिमनियों
की आग भी बुझने लगी।