फसल बर्बादी से तबाह किसानों में ट्रैक्टरों के छीनने का भी खासा मलाल है। किसानों का कहना है कि वह बेईमान नहीं है। लेकिन करें तो क्या करें जब हर साल फसलें धोखा दे रही हैं तो हम लोग बैंक की कर्ज अदायगी कहां से करें। अमर उजाला अभियान के बाद नीलामी की जानकारी हुई नहीं तो भनक भी नहीं लगती।
किसान कहते हैं बैंक और ट्रैक्टर एजेंसियों की मिलीभगत से दलालों ने सब्जबाग दिखाए थे। वह तो कहीं गए ही नहीं बल्कि दलाल ही उनके खेतों क ी खसरा-खतौनी लेकर उनके घर आए। बातों के जाल में फंसाकर उन्हें ट्रैक्टर एजेंसी तक ले गए ट्रैक्टर दिलवाकर ग्रीन कार्ड बनवाया और उसका पैसा कमीशनबाजी में हड़प लिया।
इधर उबड़-खाबड़ असिंचित जमीन पर फसलों में पैदावार नहीं हुई और उनके ट्रैक्टरों की औने-पौने दामों पर ई नीलामी कर दी गई। कहते हैं कि अगर अमर उजाला ने अभियान न चलाया होता तो इस नीलामी की उन्हें भनक भी नहीं लगती।
राठ तहसील क्षेत्र से आए बकरई के शिवरतन, रिहुंटा के रामकृपाल व गोहानी पनवाड़ी निवासी हरप्रसाद समर्थ फाउंडेशन के देवेंद्र गांधी और बांदा के आए बुंदेलखंड भविष्य परिषद के संयोजक पुष्पेंद्र रविवार को जिलाधिकारी संध्या तिवारी से मिले।
किसानों ने डीएम को इस बात पर धन्यवाद दिया कि उन्होंने उनके ट्रैक्टरों की नीलामी निरस्त करा दी। साथ ही किसानों ने बैंक से ट्रैक्टर वापस कराने की मांग की। इस मामले में जिलाधिकारी ने कहा कि वह बैंक से ट्रैक्टर वापस दिलाने की हर संभव मदद करेंगी।