शासन प्रशासन की कोशिशों के बाद भी कस्बे का जन जीवन
सामान्य नहीं हो पा रहा है। शनिवार को भी कस्बे का बाजार बंद रहा। जिससे
छोटे दुकानदार, चाट के ठेला व सब्जी वालों की रोजी रोटी चलना दूभर हो गया
है। लेकिन न्याय की लड़ाई में वह भी पीछे नहीं है। कस्बे के लोगों ने
निश्चय कर लिया है कि अपनी आवाज से सरकार को नींद से जगाकर ही रहेंगे।
स्बे
के लोग अपना नाम न छापने के शर्त पर अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहते हैं कि
प्रशासन अपनी खामियां छिपाने के लिए जान बूझकर सच्चाई को सरकार के सामने
नहीं आने दे रहा है।
900 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा वापस होने के बाद
शुक्रवार को कस्बे में कुछ दुकानें खुली। इस पर पाथामाई मंदिर में धरने में
बैठी महिलाओं ने माइक से एनाउंस किया कि कस्बे के व्यापारियों व नेताओं ने
धोखा दिया है।
अब हम अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे। इसके बाद व्यापारियों ने
दुकानें बंद कर दी और महिलाओं का साथ देने की बात कही। महिलाओं ने कहा कि
प्रशासन का प्रयास है कि सरकार को स्थिति सामान्य दिखने लगे।
लेकिन जब तक
सभी मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं
की जाती संघर्ष जारी रहेगा।