शासन की महत्वाकांक्षी समाजवादी पेंशन योजना में 5812
लाभार्थियों की चयन सूची अधिकारी कर्मचारी नहीं बना पा रहे हैं। इसके पीछे
ग्राम पंचायतों में होने वाला पंचायत चुनाव मुख्य कारण है। ग्राम पंचायतों
में चौतरफा चुनावी शोर है। लाभार्थियों की छंटनी कर नामों के प्रस्ताव
भेजे जाने से चुनाव लड़ने का मन बनाए बैठे मौजूदा प्रधानों को गणित
गड़बड़ाने का खतरा है। ऐसे में इस महत्वाकांक्षी योजना पर फिलहाल हाथ डालने
से जनप्रतिनिधि कतरा रहे हैं।
जिले में समाजवादी पेंशन योजना का
लाभ 20 हजार 95 लोगों को ही मिल पा रहा है। पिछले वर्ष चयनित लाभार्थियों
की ग्रामीणों ने शिकायतें की तो जांच में 400 लोग अपात्र मिले।
समाज कल्याण
विभाग ने इनके खातों में भुगतान पर रोक लगा दी है। वहीं 400 लोगों के
खातों में गड़बड़ी दूर नहीं हुई है। वर्ष 2014-15 में लक्ष्य के मुताबिक
30502 लाभार्थियों को पेंशन दी जानी है लेकिन विभागीय मनमानी के चलते 27
हजार 436 लाभार्थियों के आवेदन अपलोड किए गए।
जिसमें 20 हजार 95 लोग ही
पेंशन पा रहे हैं। वहीं शासन ने चालू वित्तीय वर्ष में 5812 लाभार्थियों का
और लक्ष्य दिया है इस पर चल रही कार्रवाई पूरी नहीं हो पा रही है।
ग्राम
पंचायतों में प्रधान फिर से बाजी मारने की फिराक में है। सिर्फ आरक्षण का
इंतजार है। यही कारण है कि प्रधान चुनाव को देखते किसी पचड़े में नहीं
पड़ता चाहते हैं।
प्रधानों का मानना है कि अगर किसी चहेते का पेंशन में नाम
शामिल कर दिया तो दूसरा वोटर उससे नाराज हो जाएगा। जो चुनाव में घातक
सिद्ध हो सकता है। ऐसे में चुप रहकर सभी के चहेते रह चुनाव निकालने में
भलाई है।
प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में 4636 परिवारों को समाजवादी पेंशन
दिलाने का लक्ष्य तय किया है। जबकि शहरी क्षेत्रों में 1163 लोगों को
पेंशन योजना का लाभ दिलाया जाना है।
उधर, जिलाधिकारी ने कहा कि पंचायत निर्वाचन को
निष्पक्षता के साथ कराया जाना अधिकारी व कर्मचारियों का कर्तव्य है।
उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वह अपने अधीनस्थ अधिकारियों
व कर्मचारियों का नाम व पद मोबाइल नंबर के साथ पूरा ब्यौरा एनआईसी को
उपलब्ध करा दें।