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कर्ज से परेशान किसान ने खेत में लगाई फांसी

Fri, 03 Jul 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
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मौहर गांव में फसल बर्बाद होने, आधा मुआवजा मिलने व साहूकार का कर्ज अदा न कर पाने पर एक किसान ने खेत में बबूल के पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा। वहीं एसडीएम सदर रामसुरेश वर्मा भी मौके पर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली।
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मौहर गांव निवासी रामखिलावन निषाद (65) के पांच बीघा खेती है। इसी खेती के बल पर वह अपने परिवार का जीविकोपार्जन करता था। बीते तीन वर्षों से गांव निवासी एक किसान के निजी नलकूप में रखवाली भी करता था।

ओलावृष्टि व अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होने से वह परेशान था। जब उसने रखवाली का पैसा मांगा तो पैसा देने की बजाए निजी नलकूप मालिक ने उस पर कर्जा निकाल दिया। इसके लिए करीब एक पखवारा पूर्व गांव में पंचायत भी हुई।
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कर्ज निकालने पर रामखिलावन इस नलकूप को छोड़कर गांव स्थित सरकारी नलकूप संख्या-229 में रघुनी निषाद के साथ नलकूप में ही लेटने लगा। गुरुवार को सुबह गांव में दौड़ लगाने वाले युवकों ने पेड़ पर रामखिलावन का शव लटका देखा। जिस पर उन्होंने ग्रामीणों व उसके परिजनों को जानकारी दी।

इसके बाद ग्रामीणों ने स्थानीय थाना पुलिस को भी करीब 7:30 बजे घटना से अवगत कराया। लेकिन पुलिस करीब तीन घंटे बाद घटना स्थल पर पहुंची। पुलिस के देर से आने पर ग्रामीणों में खासा रोष रहा।

किसान के पुत्र जगत ने बताया कि पिता ने वक्त जरूरत पर कुछ रिश्तेदारों व साहूकार से लगभग 30 हजार रुपये उधार ले रखा था। तीन साल से फसल बर्बाद होने के कारण वापस नहीं कर पा रहे थे, जिससे परेशान रहते थे।

इधर रखवाली करने पर भी कुछ नहीं मिला तबसे गुमसुम रहते थे। वहीं सूचना मिलने पर एसडीएम सदर रामसुरेश वर्मा व तहसीलदार सालिकराम मौके पर पहुंचे।

लेखपाल शिवकुमार कबीर ने बताया कि मृतक किसान के पास करीब पांच बीघा जमीन थी। जिसकी फसल बर्बाद हो गई। जिसके मुआवजे के रूप में पहली किश्त के रूप में 4366 रुपये की चेक मिल चुकी है। जबकि 4598 रुपये की चेक दी जानी बाकी है।

एसडीएम ने पीड़ित परिवार को मुआवजा की चेक देने के साथ समाजवादी पेंशन के तहत भी लाभ दिलाए जाने का भरोसा दिया। किसान अपने पीछे तीन पुत्र, बहू व नाती छोड़ गया हैं।
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