अतिवृष्टि से हुए नुकसान के बाद मड़ाई में लगे मजदूरी की दिहाड़ी तक नहीं निकलने पर सदमे से एक किसान की मौत हो गई। उसने 18 बीघे जमीन पर मटर, लाही और चना की बुवाई की थी। पत्नी का कहना है कि उसके पति रामगोपाल की मौत फसलों की बर्बादी और कम पैदावार के सदमे से हुई है।
क्षेत्र के रीवन गांव के रामगोपाल सोनी (75) ने 18 बीघा जमीन में फसल की सिंचाई व बुआई के लिए 30 हजार रुपये का कर्ज लिया था। प्राकृतिक आपदा में उसकी फसलें बर्बाद हो गई। किसी तरह बची-खुची फसलों को एकत्र कर 19 अप्रैल को रात में उसने मड़ाई कराई थी।
सुबह वह देखने गया तो पता चला कि 6 बीघे चने की फसल में मात्र 60 किलो चना निकला। 8 बीघे लाही के खेत में ढाई क्विंटल लाही निकली। जबकि तीन बीघे मसूर के खेत में 55 किलो ही पैदावार हुई। यह देख उसे सदमा लग गया और वहीं पर गश खाकर गिर पड़ा।
परिजनों ने उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर होती गई। इस पर उसे यहां से बाहर इलाज के लिए भेजा गया लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई।
बीती देर रात उसे वापस लाए और मंगलवार को उसका अंतिम संस्कार किया गया। उसके परिवार में लड़कों की शादी हो चुकी है। लेकिन एक लड़का व पत्नी किशना तथा बहू इसी खेती के सहारे है। इसी में उसे 30 हजार रुपये का कर्ज चुकाना था।