मौदहा कोतवाली क्षेत्र के छिरका गांव में एक युवक ने पत्नी के गम फांसी लगा ली। बीमारी से मरी पत्नी की 15 अक्तूबर को तेरहवीं होनी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा, ग्रामीणों के अनुरोध पर शव बिना पोस्टमार्टम परिजनों को सौंप दिया।
छिरका गांव के सिमली निषाद के बेटे जलमा (24) की शादी पत्योरा गांव में हुई थी। वह पिता से अलग एक मकान में पत्नी के साथ रहता था। उसकी पत्नी गर्भवती थी। प्रसव नजदीक आने पर पत्नी की अचानक तबीयत खराब हो गई। जलमा ने इधर-उधर इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। आर्थिक तंगी के चलते वह इलाज कराने के लिए शहर नहीं ले जा सका।
उसने साले को बुलाकर पत्नी को इलाज के लिए मायके पत्योरा भेज दिया। छह दिन पहले पत्नी की मौत हो गई। 15 अक्टूबर को तेरहवीं की तारीख तय हुई। इसकी तैयारी में पति जलमा और ससुर सिमली लगे थे। शनिवार को कुछ सामान भी बाजार से लाए। ग्रामीणों के मुताबिक पत्नी की मौत के बाद से जलमा गुमसुम रहने लगा। वह साथियों से कहता था कि अब जीना बेकार है।
पत्नी के गम में वह नशा भी करने लगा। शनिवार की रात उसने कमरे में रस्सी से फांसी लगा ली। प्रधान चौभइया निषाद ने बताया कि सुबह आठ बजे तक जलमा कमरे से बाहर नहीं निकला तो पिता सिमली ने परिजनों ने कहा कि उसे उठाकर लाओ, तेरहवीं के लिए लकड़ी इकट्ठा करनी है। जब कमरे का दरवाजा खोला गया तो वह फांसी के फंदे से लटका मिला। युवक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा। ग्रामीणों ने पोस्टमार्टम न कराने का अनुरोध किया। इस पर पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम शव परिजनों को सौंप दिया।