सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1.96 लाख किसान अन्न पैदा कर रहे है।
लेकिन आसमान से गिर रही आफत ने किसानों को सड़क पर ला दिया है। खेतों में
खड़ी गेहूं की फसल जमींदोज हो चुकी है। वहीं दलहन की फसलों में पानी भर गया
है। जिससे उत्पादन पर विपरीत असर पड़ेगा।
रबी अभियान में किसानों ने 2
लाख 46 हजार 461 हेक्टेयर पर फसलें बोई है। जिले में बीते 13 दिसंबर से अब
तक करीब तीन बार बरसात हो चुकी है। इधर खेतों में मटर की फसल पकी खड़ी है।
इसमें करीब 20 फीसदी मटर की फसल की कटाई हो चुकी है। लेकिन सूख चुका मटर
का दाना बरसात में अगले दो तीन दिनों में अंकुरित होने लगेगा।
काली जमीन पर
पैदा होने वाली मसूर की फसल का पानी बैरी है। हल्की बरसात (महावट) होने पर
तो यह फसल ठीक-ठाक होती है। लेकिन अधिक पानी भरने से इसे सड़ने से नहीं
बचाया जा सकता है।
बुंदेलखंड में काली मिट्टी पर मसूर की 3 से 4 क्विंटल
बीघे में पैदा होने वाली इस फसल पर उकटा रोग लगने पर अब किसानों ने मटर की
फसल को अपनाना शुरू कर दिया है।
जिले में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1 लाख
96 हजार 144 किसान खेती किसानी कर परिवार चला रहे है। बेमौसम
अप्रत्याशित वर्षा से फसलों को हुई क्षति का सर्वे कराए जाने के लिए
जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने राजस्व व कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश
जारी किए है।
सर्वे रिपोर्ट आने के बाद जिन फसलों पर 50 फीसदी से अधिक
क्षति हुई है। उन फसलों में राहत सहायता अनुमन्य कराए जाने के लिए भारत
सरकार को पत्र भेजा जाएगा। जिलाधिकारी ने किसानों से कहा कि उन्हें परेशान
होने की जरूरत नहीं है। प्रभावित फसलों में नियमानुसार राहत सहायता अनुमन्य
कराई जाएगी।