जिला उपभोक्ता फोरम ने पावर कारपोरेशन पर सात हजार रुपये का जुर्माना ठोंका है। इस मामले में उपभोक्ता ने विद्युत कनेक्शन का स्वीकृत भार अचानक बढ़ाकर सेवा में कमी करने वाद दायर किया था। मुख्यालय के मांझखोर रमेड़ी निवासीर राधाचरण ने जून 2016 में अधिशासी अभियंता विद्युत व पावर कारपोरेशन शक्ति भवन लखनऊ को पक्षकार बनाते हुए फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी।
इसमें कहा कि उसक ा कनेक्शन एक किलोवाट था जिसे उसकी जानकारी के बिना दो किलोवाट कर दिया। वादी के अधिवक्ता देवीप्रसाद शुक्ला ने बताया कि प्रार्थी के घर में इतना अधिक लोड नहीं है। सुनवाई के दौरान फोरम ने विद्युत विभाग को नोटिस भेजा, लेकिन उसका कोई जवानब नहीं दिया गया। फोरम के अध्यक्ष रामकुमार व सदस्या हुमैरा फात्मा ने सुनवाई के बाद अगस्त 2010 से 12 अक्तूबर 2015 तक के सभी बिल निरस्त कर दिए।
साथ ही अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि वह अगस्त 10 से 12 अक्तूबर 15 तक वादी के कनेक्शन के सापेक्ष एक किलोवाट का संशोधित बिल बिना किसी सरचार्ज के एक माह के भीतर उपलब्ध कराएं। वादी द्वारा जमा धनराशि 32 हजार 242 को समायोजित कर उसका कनेक्शन तत्काल जोड़े जाने के निर्देश दिए।
इसके अलावा फोरम ने आदेश दिया कि मुकदमे के दौरान वादी को हुए मानसिक कष्ट के लिए पांच हजार व मुकदमा खर्च दो हजार का भुगतान एक माह के भीतर किया जाए। समय पर अदा न करने पर विभाग को नौ फीसदी ब्याज भी देना होगा।