इसरार का शव रखकर जाम लगाए परिजन।
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पुराना बेतवा घाट मोहल्ले में बुधवार को जुए के अड्डे पर पुलिस को देख बेतवा नदी में कूदने वाले दूसरे युवक का शव भी रात डेढ़ बजे मिल गया। इस पर फिर बवाल शुरू हो गया। अधिकारियों ने आननफानन एक दरोगा, तीन सिपाहियों और तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया और दोनों मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपया मुआवजा देकर जैसे-तैसे बवाल शांत कराया। इन्हें आसरा योजना से एक-एक आवास और परिवार के एक-एक सदस्य को मानदेय पर नौकरी का भरोसा भी दिया गया है।
इस मामले में दोनों मृतकों के परिजनों की ओर से कोतवाली के दरोगा सुनील कुमार, सिपाही रामशंकर, शिवपाल, अनिल और तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज हुई है। इन पुलिसकर्मियों ने बुधवार शाम बेतवा घाट पर नदी किनारे जुए के फड़ पर छापा मारकर छह लोगों को दबोच लिया था।
इस दौरान खालेपुरा मोहल्ला निवासी इसरार उर्फ गनी (35) पुत्र मुश्ताक और रमेड़ी मोहल्ला निवासी अमित उर्फ राजाभइया पुत्र राजू धुरिया और दो अन्य लोग पुलिस से बचने के लिए बेतवा नदी में कूद गए। दो तो तैरकर बाहर निकल आए। इसरार की डूबने से मौत हो गई।
उसका शव मिलते ही भीड़ ने कोतवाली में बवाल किया, दो जगह जाम लगाकर पथराव किया। यह बवाल थमा भी नहीं था कि रात डेढ़ बजे अमित का शव भी मिल गया। इस पर फिर बवाल तेज हो गया। अधिकारियों ने बवाल शांत कराने के लिए तुरंत मामला दर्ज कराके मुआवजा दे दिया। पुलिस ने गुरुवार को भोर पहर चार बजे शवों का पोस्टमार्टम कराया।
बवाल फिर न भड़के, इस आशंका से अधिकारियों ने अपने सामने ही अंतिम संस्कार भी कराया। पूरे घटनाक्रम के दौरान डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी भी मुख्यालय में डटे रहे। उन्होंने और एडीएम डा. राजेश प्रजापति ने पीड़ित परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से भी आर्थिक मदद का भरोसा दिया। बवाल के सवाल पर अपर पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार मिश्र ने मृतकों के परिजनों को भरोसा दिया कि उन पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा।