अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत परिषदीय स्कूलों में शौचालय का होना जरूरी है। लेकिन शौचालय बेकार हैं। विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि रखरखाव के अभाव में ज्यादातर शौचालय गंदगी से पटे हैं। या फिर प्रधानाध्यापकों ने ताले जड़ दिए हैं। स्कूली बच्चों को पढ़ाई के समय शौच को बाहर जाना पड़ता है। तमाम प्रयासों के बाद शासन ने इस योजना के तहत 14 स्कूलों में शौचालय बनवाए और 20 स्कूलों के अक्रियाशील शौचालयों के निर्माण को 14.80 लाख रुपये आए हैं।
जिले में 1177 परिषदीय स्कूल हैं। बीते वित्तीय वर्ष में 114 अक्रियाशील शौचालयों का निर्माण बेसिक शिक्षा विभाग ने कराया है। लेकिन ज्यादातर में साफ सफाई नहीं रहती है। फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग की मानें तो स्कूलों के बच्चे शौचालयों का उपयोग करने लगेे हैं। वहीं देखा जाए तो शहरी क्षेत्र मौदहा, हमीरपुर में ज्यादातर स्कूल किराए के भवनों पर चल रहे हैं।
जिसके चलते इन स्कूलों में जगह का अभाव है और शौचालय नहीं बन पा रहे है। इतना ही नहीं विभागीय अभिलेखों पर अगर नजर डालें तो शहर के 10 स्कूलों में चाहकर भी शौचालयों का निर्माण नहीं कराया जा सकता है। ऐसे तीन मुख्यालय में और सात मौदहा कस्बे के स्कूल हैं।
वहीं कुछ स्कूलों के शौचालय ऐसे हैं जिन पर प्रधानाध्यापक ताला जड़े रहते हैं। जिससे माना जा रहा है कि इनकी सफाई व्यवस्था चौकस है लेकिन शौच करने बच्चे नहीं जा पा रहे हैं। शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को एक स्कूल में दो यूनिट शौचालय के लिए 70 हजार की धनराशि मुहैया कराई है। वहीं अक्रियाशील 20 स्कूलों के शौचालयों में प्रत्येक में 25 हजार रुपये की धनराशि दी गई है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी डा.रामचंद् ने कहा कि अनिवार्य सर्व शिक्षा के तहत
जिले में 14 नए शौचालयों के निर्माण को 9.80 लाख व 20 अक्रियाशील शौचालयों
के लिए पांच लाख का बजट मिला, जिसे संबंधित स्कूलों को भेज दिया गया है।
शौचालय बनाने का नक्शा भी स्कूलों को दिया है। ग्राम शिक्षा समिति के जरिये
निर्माण होगा। बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय व मूत्रालय बनेंगे।
इन विद्यालयों में शौचालय को भेजा बजट
कन्या पूर्व माध्यमिक भिलावां, मुख्यालय में नर्सरी स्कूल, प्राथमिक विद्यालय इटरा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय पाराओझी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बरुआ, पूर्व माध्यमिक स्कूल पत्योरा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय पंधरी, कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय अतरार, कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय गहरौली, कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुसैना, उच्च प्राथमिक विद्यालय पहाड़ीबीर, कन्या प्राथमिक विद्यालय गोहांड व प्राथमिक विद्यलाय बच्ची का डेरा।
वाटर प्यूरीफायर सिस्टम योजना धड़ाम
ग्राम पंचायतों में तैनात सफाई कर्मी भी स्कूलों की सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरत रहे हैं। यही कारण है कि ज्यादातर शौचालय गंदगी से पटे हैं। वहीं शौचालयों में रखी गई पानी की टंकियां भी बेमकसद साबित हुई है। हैंडपंपों में वाटर प्यूरीफायर सिस्टम लगाकर टंकियों पर पानी चढ़ाने का काम हुआ। लेकिन इस काम को करने वाली कार्यदाई संस्था अपना काम कर तो कर चली गई मगर प्यूरीफायर सिस्टम कारगर साबित नहीं हो सका। फिलहाल पानी का प्रबंध शौचालयों में नहीं होने से गंदगी हटाने को सफाई कर्मी एक बाल्टी पानी डालने में शर्मा रहे हैं।