मौरंग का अंधाधुंध खनन करने वाले माफिया तो मालामाल हो गए, लेकिन स्थानीय लोगों को मुसीबत में डाल गए। नदियों की जलधारा से निक ली मौरंग से टपकने वाले पानी ने सड़कों क ी सूरत बदल दी। हालत यह है कि मौरंग भरे ओवर लोड वाहनों ने पुलों को भी जर्जर कर दिया है।
321 किमी लंबाई पर फैली नदियों पर ही अंधाधुंध खनन किया गया है। जिले में लाल सोना कही जाने वाली मौरंग का खनन बेतवा, केन, विरमा व धसान नदियों से किया जाता है। सबसे ज्यादा मौरंग की खदानें बेतवा नदी पर संचालित हैं। बेतवा नदी की जिले में लंबाई 137 किमी है। यही कारण है कि जिले का
खनिज विभाग इसी नदी पर सर्वाधिक पट्टे करता है। इसके बाद मौदहा तहसील को छूते हुए केन नदी गुजरती है। जिसकी जिले के अंदर लंबाई 22 किमी है। धसान नदी की लंबाई 71 किमी है। जबकि विरमा नदी की लंबाई 94 किमी है। धसान नदी पर जिगनी गांव के अंदर से मौरंग भरे ट्रकों को निकालने पर
ग्रामीणों ने कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। फिलहाल नदियों की जलधारा से निकली मौरंग से टपकने वाले पानी ने सड़कों क ी सूरत बदल दी है। इन सड़कों पर ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो रहा है। इन्हीं नदियों पर चंदवारी-घुरौली, इछौरा जिटकरी, जिगनी, भुलसी, इस्लामपुर, बिरहट, बधौली, टोलाखंगारन,
चिकासी, पत्योरा, रिरूआ बसरिया, भेड़ी खरका, कंडौर, टीकापुर, नैठी, सहुरापुर, बेरी, गिमुंहा, बक्छा खादर जैसे गांवों में 49 मौरंग खनन के पट्टे 2012 में किए गए। जिन्हें उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया। सीबीआई ऐसे ही कई बिंदुओं पर जांच कर सकती है।
किसी भी नदी पर कोई मौरंग का पट्टा नहीं है। सारे पट्टे निरस्त हैं। किसी को भी मौरंग खनन की अनुमति नहीं है। मौरंग की अवैध उठान को लेकर जिलाधिकारी ने 30 अधिकारियों की टीमें गठित कर दी हैं।
रामकुमार, जिला खनिज अधिकारी