हमीरपुर। पत्नी की हत्या किए जाने के मामले में दोषी पाए जाने पर गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम न्यायाधीश शैलोज चंद्रा ने पति व सास को दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने दोनों को उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई है।
न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता आनंद कुमार सक्सेना ने बताया कि सिसोलर थानाक्षेत्र के खैर गांव निवासी बुधिया पत्नी रामआसरे ने अपनी पुत्री रिंकी की शादी मौदहा कोतवाली के ढीहा डेरा निवासी नरेश पुत्र रामाधीन निषाद के साथ वर्ष 2011 में की थी। बताया कि शादी के बाद से पति नरेश, ससुर रामाधीन, सास रज्जन बहू से 20 हजार रुपयों की मांग कर उसका उत्पीड़न करने लगे।
योजना बनाकर पिछले 16 अक्तूबर 2013 को ससुरालीजनों ने खाना बनाते समय रिंकी को मिट्टी का तेल डालकर जला दिया। जिसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां चार नवंबर 2013 को रिंकी की इलाज दौरान मौत हो गई। जिला अस्पताल में मृत्यु से पूर्व मजिस्ट्रेट द्वारा लिए गए बयान में रिंकी ने बताया था कि पति जुआं व दारू करता है। जिसके चलते पति व सास ने मिलकर उसे जलाया है।
पुलिस ने ससुरालीजनों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया। गुरुवार को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने पति व सास को दोषी पाए जाने पर उम्रकैद व प्रत्येक को 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मृतका के मायके व ससुराल वालों में मुकदमा परीक्षण के दौरान राजीनामा हो गया। जिस पर मृतका की मां, भाई व बहन ने आरोपियों के पक्ष में बयान दिए।
दहेज की मांग कर परेशान करने की बात से भी इंकार किया। मगर मृतका द्वारा मृत्यु पूर्व दिए गए बयान के आधार पर ससुर को निर्दोष पाते हुए पति व सास को सजा सुनाई गई।