लगातार तीसरे दिन भी धूप नहीं निकलने से ठिठुरन बढ़ गई है। ठंड की वजह से इंसान के साथ पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। पक्षियों की चहचहाट भी बंद हो गई है। दिन में भी अलाव जल रहे हैं। शनिवार को अधिकतम तापमान 14 और न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
शीतलहरी का प्रकोप कम होने का नाम नही ले रहा है। तीसरे दिन भी धूप नहीं निकलने से ठंड से लोग व्याकुल हैं। शाम होते ही ठंडी हवाओं के चलने से लोग घरों में दुबक जाते है। ठंड का असर ज्यादातर ग्रामीण इलाकों के पशुओं पर साफ दिखाई दे रहा है।
ठंड से बचाव के लिए पशु मालिक पशुओं को बोरे से ढके हैं। अधिकांश लोग आग जलाकर पशुओं का तपा रहे है। ठंड को देखते हुए प्रशासन ने प्राथमिक जूनियर स्तर तक के सभी विद्यालयों को बंद करने के निर्देश दिए है मगर मान्यता प्राप्त व कान्वेंट स्कूल संचालक इस आदेश को नही मान रहे है।
जिससे सुबह होते ही नौनिहालों को सिकुड़ते हुए स्कूल जाना पड़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को अधिकतम तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री रिकार्ड किया गया।
एक सप्ताह से मौसम के मिजाज बदलने से किसान चिंतित हैं। धूप नहीं निकलने से किसानों की दलहनी फसलों पर संकट मंडराने लगा है। धूप नहीं निकली तो किसानों को दलहनी फसलों में नुकसान हो सकता है।
एक सप्ताह से धूप नहीं निकलने से चना, मसूर, मटर की फसल को नुकसान हो सकता है। इस समय मटर, चना और मसूर की फसल में फूल खिलने का समय होता है।
धूप न होने से यह फसल पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो रही है। इसके साथ ही दलहनी पौधे की ग्रोथ नहीं मिल रही है। कहीं कहीं तो पाला मारने का डर है।
फसलों में रोग लगने का डर किसानों को सताने लगा है। अटगांव के किसान जमुनादीन, मंगलसिंह, जयसिंह, परशुराम ने बताया कि धूप न निकलने से दलहनी फसलें का फूल गिर सकता है। मसूर की फसलों में कीडे़ लगने का भी डर है।