सीबीआई टीम की जांच में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। मौरंग माफिया सरीला तहसील में बेतवा नदी किनारे वन विभाग के जंगल में 36 बीघे रकबे से बेश कीमती मौरंग भी ले गए। चोरी गई मौरंग की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। उधर, जांच एजेंसी के अधिकारियों ने देर शाम जालौन के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी से पूछताछ की।
बेतवा नदी की तलहटी से रिरूआ-बसरिया के आसपास वन क्षेत्र है। जो अब पूरी तरह समतल हो चुका है। इस क्षेत्र में बेतवा नदी पर आई बाढ़ से मौरंग पट गई। इसी क्षेत्र के अगल-बगल कई मौरंग खदानों के पट्टे संचालित रहे। क्षेत्र में ही वंशी पुत्र भरोसी निवासी बसरिया के गाटा संख्या 48/14 रकबा 0.405 हेक्टेयर पर अवैध तरीके से मौरंग का खनन किया गया। जिसमें 16.800 घन मीटर मौरंग अवैध रूप से निकाल ली गई। इस मौरंग की रायल्टी 12 लाख 60 हजार रुपये खनिज विभाग ने बनाई। जिसका बाजारू मूल्य 63 लाख रुपये बताया गया। खनिज विभाग ने वंशी के खेत से निकाली गई मौरंग पर 75.60 लाख रुपये चालान काट दिया।
वंशी ने ही यह रकम बैंक में 27 फरवरी 2016 को जमा करा दी। माना जा रहा है कि माफिया ने ही इसका भुगतान किया। उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने वाले विजय द्विवेदी एडवोकेट ने बताया कि इसी जमीन से लगा वन विभाग का जंगल है। नदी के किनारे होने से जंगल में करीब 150 फिट ऊंचाई तक मौरंग पड़ी थी। जिसकी उठान कर माफिया ने अरबों रुपये का खेल कर दिया है। बोले, यह जानकारी बयानों में सीबीआई को भी दी है। किसी भी दिन सीबीआई इस मौरंग क्षेत्र की वीडियोग्राफी कर सकती है। उधर, सोमवार शाम को जालौन के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी से सीबीआई पूछताछ करती रही। एडवोकेट द्विवेदी के अनुसार इनके नाम भी खनन का पट्टा है।
पांच सालों में दस हजार करोड़ की अवैध मौरंग उठाई
सूत्रों के अनुसार अवैध खनन में पिछले पांच सालों में करीब दस हजार करोड़ रुपयों का वारा न्यारा होने का अनुमान है। जिसका लाभ लंबी पहुंच वाले सत्ताधारियों ने उठाया है। बसपा व सपा शासन काल में मौरंग सिंडीकेट का खेल शुरू हुआ। जो दस सालो में दस गुना तक बढ़ गया। सिंडीकेट में कई विधायक, एक पूर्व मंत्री के दामाद, नामचीन शराब माफिया, एमएलसी सरीखे लोग जुड़े रहे। सिंडीकेट की शुरुआत 1100 रुपये प्रति ट्रक से शुरू हुई। जो धीरे-धीरे बढ़कर 11 हजार रुपये तक पहुंच गई। सिंडीकेट के नाम पर होने वाली वसूली का 70 फीसदी धन प्रदेश स्तरीय नेताओं को भेजा जाता था। जबकि 30 फीसदी अवैध वसूली सिंडीकेट वसूलने वाले अपने पास रखते थे। सीबीआई इन्हीं पहलुओं को टटोलने में लगी है।
74 ट्रकों से सिंडीकेट ने दो लाख 22 हजार वसूला
जालौन जनपद की बड़ेरा माफ की खदान के खंड संख्या आठ के मिले एक खर्च पर्चे में हिसाब में पुलिस पर भी लंबा खर्च दर्शाया गया है। 27 जुलाई 2015 के इस पर्चे में सिंडीकेट खर्च में 74 गाड़ियों को तीन हजार प्रति गाड़ी के हिसाब से दो लाख 22 हजार रुपये खर्च दिखाया गया है। वहीं, एक ट्रक में दो हजार सिंडीकेट दिखाया है। इस खर्च में 500 रुपये पुलिस गश्त थाना के नाम पर डाला गया है। इसी तरह इसी खंड के 30 जुलाई 2015 के खर्च में एक लाख 80 हजार रुपये सिंडीकेट खर्च दिखाया है। जबकि 30 हजार रुपये जालौन के एक एसओ के नाम भी दर्ज है।
अभी तक तीन पट्टा धारक पेश हुए सीबीआई के सामने
पिछले छह दिनों से डेरा जमाए सीबीआई खनन से जुड़े पट्टेधारकों के बयान दर्ज करने में जुटी है। कुल 60 पट्टाधारकों में से अभी तक मात्र तीन ही बयान दर्ज कराने सीबीआई के पास पहुंचे हैं। अन्य पट्टाधारक भूमिगत होने के साथ मोबाइल बंद कर चुके हैं। इधर सीबीआई शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर रही हैं। जिनके खेतों से जबरन खनन किया गया है। उनमें कुरारा थानाक्षेत्र के कंडौर गांव निवासी जगत सिंह 25 फरवरी 2016 को जिलाधिकारी को रजिस्टर्ड डाक से शिकायती पत्र भेज जबरन खेत से रास्ता बनाकर अवैध खनन का आरोप लगा चुके हैं।
उसी को आधार मानकर सीबीआई टीम ने जगत सिंह के भी बयान दर्ज किए हैं। कं डौर के सुभाष सिंह, बृजेश सिंह, नैठी के महेंद्र सिंह सहित अन्य लोगो ने बयान दर्ज कराए हैं। सोमवार को एमएलसी रमेश मिश्रा के भाई दिनेश कुमार के अलावा एक अन्य पट्टा धारक आया जिससे सीबीआई ने पूछताछ की। वहीं बांधुर के अजय सिंह अपनी पत्नी रेखा को लेकर शिकायत दर्ज कराने आए।