एग्रीकल्चर फाइनेंस कारपोरेशन के जरिए शेयर पूंजी
अनुदान एवं ऋण गारंटी अनुदान योजना में शामिल किसानों को जानकारी दी गई।
शुक्रवार को उप कृषि निदेशक सभागार में कंपनी गठित करने वाले किसान समूहों
को ऋण लेने के तरीके बताए गए। बताया गया कि एक करोड़ रुपये का ऋण लेने में
गारंटी की जरूरत नहीं है। बल्कि संबंधित किसान कंपनी के पास 15 लाख की
पूंजी होना जरूरी है।
उप कृषि निदेशक सभागार में आयोजित बैठक में
बैंकर्स, नाबार्ड और कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी के बीच एएफसी के
प्रबंधक एसबी कटियार ने कहा कि किसान उत्पादन कंपनी का संचालन करने के लिए
सबसे पहले विधिवत रूप से 1956 के भाग 9 (ए) के अंतर्गत पंजीकृत होनी चाहिए।
इसमें कम से कम 50 किसान सदस्यों को शामिल होना जरूरी है। जिसमें कम से कम
33 फीसदी शेयर धारक सीमांत एवं भूमिहीन किसान होने चाहिए।
बताया कि किसी
भी सदस्य द्वारा लिए गए शेयरों की संख्या कुल पूंजी में 5 प्रतिशत से अधिक
नहीं होनी चाहिए। बताया कि कंपनी एक साल पुुरानी होनी चाहिए। कहा कि पांच
सदस्यीय बोर्ड गठित किया जाएगा।
वहीं प्रबंध समिति भी गठित करनी होगी। इसके
बाद भारत सरकार संबंधित कंपनी को शेयर पूंजी के रूप में 10 रुपये का
अनुदान देगी।
साथ ही कंपनी द्वारा अपनी पूंजी 15 लाख लगाने पर बैंक से ऋण
के रूप में 85 लाख रुपये का ऋण मिलेगा। इसमें कंपनी को गारंटी देने की
जरूरत नहीं है। बैंक में कंपनी की गारंटी नाबार्ड या एएफसी देगा।
गठित की
जाने वाली कंपनियां जिस क्षेत्र में कृषि उत्पादन अधिक होता है उससे
संबंधित कारोबार कर सकतीं हैं। नाबार्ड डीडीएम मोहित सायंकृत ने बताया कि
किसानों के लिए यह हितकारी योजना है।
इसका उन्हें लाभ लेने की जरूरत है।
बताया कि राठ क्षेत्र में ऐसी ही सात कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
बैठक में लघु डाल के अधिशाषी अभियंता सुजीत कुमार, नलकूप के टी सिंह,
एलडीएम एसके साहू, भूमि संरक्षण अधिकारी देवेंद्र सिंह निरंजन व रामकुमार
माथुर, जिला कृषि अधिकारी धर्मराज सिंह, एसबीआई के प्रतिनिधि आरसी वर्मा,
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के एसके मिश्रा, कृषि विज्ञान केंद्र कुरारा के
वैज्ञानिक डा.सीके राय सहित अन्य अधिकारी व किसान मौजूद रहे।