राजस्व विभाग ने फसलों में हुई क्षति का आकलन कर 48.82 करोड़ रुपये मांगे
लेकिन शासन से अब तक 16 करोड़ 62 लाख 97 हजार रुपये ही मिल पाए हैं। इतने
बजट से जिले के 64,106 किसानों को ही राहत राशि बांटी गई है। मदद इतनी कम
है कि प्रभावित किसानों को यह ‘राहत’ की चेक ‘आहत’ कर रही है।
दो सालों
से बेमौसम बारिश से तबाह हो रहे किसानों के जख्म इतने गहरे हो चुके हैं
कि शासन से दिया जा रहा मुआवजा मरहम के बजाय उन्हें नमक का दंश दे रहा है।
हालिया मुआवजा धनराशि इतनी कम है कि इससे वे एक माह का राशन भी पूरा नहीं
कर सकते हैं।
कहने को शासन ने अब मुआवजा राशि दोगुनी कर दी है लेकिन किसान
इसे भी ऊंट के मुंह में जीरा बता रहे हैं। पंधरी गांव के किसान धर्मेद्र
सिंह ने बीते 16 मार्च को सिर्फ 4500 रुपये का चेक मिलने पर उसे
प्रधानमंत्री कार्यालय को रजिस्ट्री कर वापस भेज दिया।
गौरतलब है कि रबी
अभियान में किसानों ने 2,64,273 हेक्टेयर पर फसलें बोई है। इसमें 1,03,072
हेक्टेयर में गेहूं, 75,076 हेक्टेयर में चना, 19,124 हेक्टेयर में मटर,
28,669 हेक्टेयर में मसूर व 19,194 हेक्टेयर में लाही/सरसों है जबकि 19,133
हेक्टेयर क्षेत्रफल में अन्य फसल बोई गई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले
में 478 प्रभावित गांवों के 1,93,139 किसान प्रभावित हुए हैं। गेहूं की फ
सल खेतों में गिरने से 60-70 फीसदी पैदावार प्रभावित हुई है। आए दिन मौसम
की ‘रंगत’ से परेशान किसान बची-खुची फसल समटने में जुटा है।
प्रशासन के
मुताबिक करीब 37 फीसदी नुकसान हुआ है जबकि सर्वाधिक बोई जाने वाली दलहन की
फसलों में चना में 88 फीसदी, मसूर में 89 व मटर में 90 फीसदी नुकसान हुआ
है। शासन से बड़े काश्तकारों को अधिकतम 4500 रुपये और छोटे किसानों को
न्यूनतम 750 रुपये मुआवजा दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि दलहन में जुताई,
बुआई और खाद, बीज में प्रति हेक्टेयर करीब 15 हजार रुपये आता है। वहीं
गेहूं की फसल में प्रति हेक्टेयर करीब 25 हजार खर्च आता है। शासन से दी
जाने वाली 750 रुपये की चेक जब छोटे किसान बैंक लेकर जाते हैं तो पहचान
पत्र न होने पर उन्हें वापस कर दिया जाता है। सदर तहसील के कुम्हऊपुर गांव
के किसान सैय्यददीन के मुताबिक, परिचयपत्र न होने पर चेक का पैसा उसे नहीं
मिल पाया।