पौथिया क्षेत्र की मौरंग खदानें भले ही शासन को भारी राजस्व दे रही हैं,
लेकिन मौरंग की ढुलाई करने वाले ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही से राठ मार्ग की
सूरत ही बदल गई है । मार्ग पर गहरे गड्ढों की भरमार से वाहनों का चलना बेहद
मुश्किल हो गया है। गड्ढों से वाहनों में आएदिन होने वाली टूट फूट भी जाम
का कारण बन रही है। धूल के गुबार उड़ने से वाहनों का चलना बेहद मुश्किल हो
गया है।
क्षेत्र में बेतवा नदी के किनारे एक दर्जन से अधिक मौरंग की
खदानें चल रही हैं। इन खदानों में सैकड़ों ट्रक मौरंग लेने आतेे हैं। राठ
मार्ग पर करीब 20 किमी का सफर ट्रक पूरा कर रहे हैं। इन्हीं ट्रकों ने इस
मार्ग की सूरत बिगाड़ दी है। एक ओर शासन को मौरंग से अच्छा खासा राजस्व मिल
रहा है।
वहीं मौरंग भरे ट्रकों से टूट चुकी सड़क बड़े बड़े गड्ढों में
तब्दील हो गई है। पीडब्लूडी के मजदूर सड़क पर दिखाई तो देते है, लेकिन वह
भी हल्के फुल्के गड्ढों को भरने तक सीमित हैं। जर्जर सड़क पर उड़ने वाली
धूल संक्रामक बीमारियां फैला रही हैं। इसमें सड़क किनारे बसे परिवार सबसे
ज्यादा परेशान हैं।
सड़क के जर्जर होने से इस पर रोडवेज बसों का संचालन भी
प्रभावित हो रहा है। यही कारण है रोडवेज ने अपना मार्ग ही बदल दिया है। राठ
जाने वाली बस मौदहा बाया बसवारी होकर चलाई जा रही हैं। चंदुलीतीर गांव की
नालियों का पानी सड़क पर खुलता है, इससे मार्ग पर हमेशा जलभराव रहता है।
रूट बदलने से 12 गांव प्रभावित
कुछेछा
गांव से मुड़ते ही संकट पैदा होने लगता है। स्वासा तक का 20 किलोमीटर
मार्ग बेहद जर्जर है। फिलहाल रोडवेज का रूट बदलने से चंदुलीतीर, सहजना,
कीरतपुर, कलौलीतीर, पौथिया, उजनेड़ी, सिकरी, सहुरापुर, ललपुरा, कलौलीजार,
कुम्हऊपुर, नदेहरा, मवई, बंडा, मोराकांदर, बहदीना, अछपुरा, बजेहटा,
रुरीपारा आदि एक दर्जन गांवों को लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़
रही है। अब इन गांवों के ग्रामीणों को सिर्फ डग्गामार वाहनों से ही सफर तय
करना पड़ रहा है।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता यूबी सिंह ने कहा कि मार्ग की मरम्मत को स्टीमेट बनाकर शासन
को भेजा गया है। बजट मिलने पर काम शुरू कराया जाएगा। वैसे इस मार्ग को
बनाने के लिए विश्व बैंक ने पैसा दिया है। कानपुर लोक निर्माण विभाग इकाई
को टू लेन सड़क बनानी है। टेंडर प्रक्रिया जारी है।