सरीला कस्बे की कांशीराम कालोनी में डेढ़ साल से
वीरान पड़े विद्यालय को यहीं के बेरोजगार युवकों ने शिक्षा का मंदिर बना
दिया है। कालोनी के करीब 60 बच्चों को यह बेरोजगार युवक नि:शुल्क शिक्षा दे
रहे हैं। हालांकि इन बच्चों का पंजीकरण दूसरे स्कूलों में है, लेकिन
स्कूलों की अधिक दूरी होने से बच्चे वहां जाने से डरते हैं। इतना कुछ होने
के बाद भी विभाग अभी चुप्पी साधे बैठा है।
नगर में सरीला ममना रोड पर दो
साल पहले आवास विकास निगम ने कांशीराम कालोनी का निर्माण कराया। इस कालोनी
में प्राथमिक स्कूल, कैंटीन व चिकित्सालय का भी निर्माण हुआ।
डेढ़ साल
पूर्व यहां के आवास पात्रों को आवंटित भी कर दिए गए है। करीब 200 परिवार
यहां रह रहे हैं। यहां बने प्राथमिक विद्यालय का आलीशान भवन होने के बावजूद
विभाग ने इसकी सुध तक नहीं ली है।
कालोनी में रहने वाले करीब 70 बच्चे
स्कूली शिक्षा भी ग्रहण करते हैं, लेकिन कालोनी से स्कूलों की दूरी करीब दो
किमी होने के कारण छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने नहीं जाते हैं। अभिभावकों को
बच्चों को स्कूल छोड़ने व लेने जाना पड़ता है।
कभी-कभार स्कूली बच्चे घर
वापस आते समय थक हार कर बीच में ही बैठ जाते हैं। बच्चों के घर न आने तक
अभिभावकों को चिंता सताती रहती है। स्कूल कम जाने से बच्चों की पढ़ाई भी
प्रभावित हो रही है।
इसे देखते हुए कालोनी के बेरोजगार युवक गुलाब, फूलसिंह
व रूकसान ने वयोवृद्ध समाजसेवी रामदेवी के निर्देशन में बच्चों को
नि:शुल्क शिक्षा देने की ठान ली है और वीरान पड़े कालोनी के विद्यालय में
बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है।
रामदेवी ने बताया कि यहां 60 बच्चे
पढ़ते हैं। हालांकि बड़ी उम्र के बच्चों के नाम दूसरे स्कूलों में लिखे
हैं। छोटे बच्चों के नाम कहीं पंजीकृत नहीं है।
बताया कि इस समस्या के
निदान के लिए कई बार आला अफसरों से गुहार भी लगाई, लेकिन कोई निराकरण नहीं
हुआ तो अपने बच्चों को खुद पढ़ाने का बीड़ा उठा लिया है।
खंडशिक्षाधिकारी
श्याम प्रकाश यादव ने कहा कि विद्यालय भवन बनकर तैयार है। बस इसे संचालित
कराया जाना है। विद्यालय को चालू कराने के लिए वह जिला स्तरीय अधिकारियों
से बात करेंगे। फिलहाल उन्होंने विद्यालय का भवन देखा नहीं है।