जिले में करोड़ों रुपये की लागत से चेकडैम बनाकर भूगर्भ जल स्तर को उठाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कार्यदाई संस्था की मनमानी से चेक डैम ध्वस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर गुरुवार को सीडीओ अवधेश बहादुर सिंह ने नारायच गांव के पास ऐसे ही एक चेकडैम का निरीक्षण किया। इसे बने अभी तीन साल पूरे नहीं हुए और ध्वस्त हो गया। सीडीओ ने किसानों से जांचकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पूरे जनपद में चेकडैमों के निर्माण में नेताओं का दबाव व अधिकारियों की कमीशन खोरी हावी है। इसके चलते मानकों के अनुरूप चेकडैम नहीं बनाए जा रहे हैं। ऐसे में भूगर्भ जलस्तर ऊपर उठाने की मंशा पर पानी फिरता जा रहा है।
जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण गुरुवार को देखने को मिला। भमौरा गांव निवासी भाकियू नेता कबीरूद्दीन की शिकायत पर जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने सीडीओ अवधेश बहादुर सिंह को चेकडैम का निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
सीडीओ को नारायच गांव के निकट चंद्रावल नदी में वर्ष 2012 में लाखों रुपये कीमत से बना चेकडैम पूरी तरह ध्वस्त मिला। इसके बीच की क्रिस्टलवाल व दोनों किनारे ध्वस्त मिले। इसमें न तो एक बूंद पानी रुकता है और न अब इसका किसानों को लाभ मिल रहा है। इस दौरान क्षेत्र के अन्य किसान भी पहुंच गए और उन्होंने कहा कि जब चेकडैम बन रहा था।
तभी इसकी शिकायत उन्होंने की थी। नतीजा यह हुआ कि यह चेकडैम बुरी तरह से ध्वस्त हो गया। मंगलवार को इसी चेकडेम के पानी में दो बच्चों की डूबकर मौत हो चुकी है। सीडीओ ने कहा कि मामले की तकनीकी जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी।