अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। करीब चार वर्ष पूर्व जालौन जिले के आटा थानाक्षेत्र के करमेर गांव में पति की हत्या के मामले की सुनवाई शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट राधेश्याम यादव की अदालत में पूरी हुई। अदालत ने पत्नी सहित पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए पुलिस हिरासत में लेने का आदेश सुनाया। अदालत शनिवार को मामले में सजा सुनाएगी।
न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता शैलेष स्वरूप चौरसिया ने बताया कि छह जून 2014 को जालौन जिले के आटा थानाक्षेत्र के करमेर गांव निवासी हिम्मत सिंह पत्नी प्रियंका के साथ उरई के लिए निकला था। तभी गांव के हलकाई व उसके पुत्र प्रदीप, विवेक और हलकुट्टा उनके पीछे निकल पड़े। आठ जून 2014 को जब हिम्मत की पत्नी करीब दस बजे घर वापस पहुंची तो हिम्मत के भाई परमानंद ने प्रियंका से अपने भाई के बारे में पूछा। इस पर प्रियंका गोलमोल जवाब देने लगी। परमानंद ने आटा थाने में भाई की गुमशुदगी की जानकारी दी। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की। 10 जून 2014 को परमानंद के रिश्तेदार अतरा गांव निवासी देवेंद्र व विजयपाल ने बताया कि छह जून को जब वह घर आ रहे थे तो हलकाई व उसके पुत्र प्रदीप, विवेक को साथी हलकुट्टा के साथ प्रियंका को मझगंवा पुलिया के पास हिम्मत की हत्या करते हुए देखा था। जब परिजन घटनास्थल गए तो हिम्मत का क्षत विक्षत शव वहां पड़ा मिला।
परमानंद ने राठ थाने में प्रियंका सहित पांचों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। हत्या कर लाश छिपाने में दोषी पाते हुए शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट राधेश्याम यादव ने प्रियंका, हलकाई व उसके पुत्र प्रदीप, विवेक, साथी हलकुट्टा पर सुनवाई करते हुए दोष सिद्ध कर हिरासत में लेने के आदेश दिए। शनिवार को आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी।
-जालौन जिले के करमेर गांव के निवासी हैं, अदालत आज सुनाएगी फैसला