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पुलिस किशोर की फरियाद सुन लेती तो न जख्मी करता गर्दन

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राठ। कस्बे के कांशीराम कालोनी निवासी किशोर की यदि पुलिस ने फरियाद सुन ली होती तो शायद वह अपनी गर्दन जख्मी करने पर मजबूर नहीं होता। कस्बे में यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में कहीं न कहीं पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। घायल के परिजनों का कहना है कि घंटों थाने में बैठने के बाद जब पुलिस ने नहीं सुनी तो उसने यह घातक कदम उठा लिया। युवक जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
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सोमवार की दोपहर कांशीराम कालोनी निवासी राकेश अनुरागी (15) पुत्र काशी अनुरागी को मोबाइल पर भेजी गई कुछ फोटो को लेकर आरोपी युवक परेशान था। कुछ युवक उसे धमकी दे रहे थे। इस पर युवक कोतवाली पहुंचा और वहां बैठे एक दरोगा से जान माल की गुहार लगाई। घायल युवक के परिजनों का कहना है कि थाने में तैनात एक दरोगा युवक को तीन घंटे तक कोतवाली में बैठाए रहा। लेकिन जब पुलिस ने उसकी नहीं सुनी। मायूस किशोर ने कंबू तालाब के पास पहुंचकर ब्लेड से गर्दन जख्मी कर तालाब में कूद गया और जान देने का प्रयास किया।पुलिस किशोर को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताकर अपना पलड़ा झाड़ रही है।

कोतवाली में शिकायत करने गए फरियादियों को पुलिस ने भगाया
राठ। मंगलवार को कोतवाली पुलिस का एक नया रूप उस समय देखने को मिला जब एक एसआई ने थाने में बैठे पीड़ितों के साथ अभद्रता कर उन्हें भगा दिया। बतादें कि विभाग के आलाधिकारी जहां पुलिस को आम नागरिकों और पीड़ितों से भद्र व्यवहार कर सभ्यता का पाठ पढ़ा रहे हैं वहीं पुलिस के आलाधिकारियों के इन आदेशों की धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि वह अपनी फरियाद लेकर कोतवाली जाते हैं। लेकिन उनकी .शिकायत सुनने के लिए कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। जब वह अपनी फरियाद लेकर कोतवाली परिसर में बैठे हुए थे तभी वहां तैनात दरोगा और सिपाहियों ने कोतवाली प्रभारी के सामने अभद्रता कर उन्हें भगा दिया। इस मामले में कोतवाल मनोज कुमार का कहना है कि थाने में आने वाले प्रत्येक फरियादी की समस्या सुनी जाती है।
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