बढ़ती आबादी के बीच जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। देखा
जाए तो परिवार नियोजन के अपनाए गए संसाधनों का असर हुआ है। वर्ष 2012 में
एनुअल हेल्थ के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले में 69.9 फीसदी लोग परिवार
कल्याण कार्यक्रमों को अपना रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के
बावजूद दस वर्षों में 11.12 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। जिसमें मुस्लिमों की
आबादी में 9.87 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है तो हिंदू की आबादी 5.27 प्रतिशत
बढ़ी है। हालांकि परिवार कल्याण कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाओं ने
भागीदारी की है। इसमें 177 महिलाओं ने आपरेशन कराया है। जबकि कापर टी के
जरिए परिवार को छोटा रखने में हिंदू महिलाओं क ी अपेक्षा मुस्लिम महिलाओं
ने ज्यादा अपनाया है।
साल 2001 की जनगणना के मुताबिक जिले की कुल
आबादी 9,93,792 थी, जो वर्ष 2011 के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या 11,04,285
है। इसमेें 1,10,493 जनसंख्या बढ़ी है। पहले 9,59,438 हिंदू थे।
जो अब
बढ़कर 10,10,014 हो गए हैं। वहीं 2001 में मुस्लिमों की संख्या 83,064 थी।
जो बढ़कर 91,269 हो गई है।
वहीं ईसाई 814, सिक्ख 194 व बौद्ध 74 व जैन 41
है। इस तरह देखा जाए तो हिंदू 5.27 प्रतिशत की दर से जनसंख्या वृद्धि हुई
है जबकि मुस्लिम 9.87 प्रतिशत की दर से आबादी बढ़ी है।
वैसे देखा जाए तो दस
साल में परिवार नियोजन को अपनाने वालों का प्रतिशत बढ़ा है। स्वास्थ्य
विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010 से 2012 तक एनुअल हेल्थ संस्था
ने जिले में सर्वे किया।
इन सर्वे रिपोर्टों के अनुसार 2010 में 19.4
प्रतिशत, 2011 में 17.1 व 2012 में 69.9 प्रतिशत लोग परिवार कल्याण
कार्यक्रमों को अपनाने लगे हैं। जिले में 2014-15 में 16 पुरुषों ने नसबंदी
आपरेशन कराया।
जबकि 2,458 महिलाओं ने नसबंदी कराई। इसमें देखा गया कि
मुस्लिम महिलाएं भी जनसंख्या नियंत्रण के साधनों को अपनाने के लिए आगे आईं।
कुल 177 मुस्लिम महिलाओं ने नसबंदी आपरेशन कराया है।
जबकि मुस्लिम पुरुष
नसबंदी कराने में आगे नहीं आए। मुस्लिमों की आबादी मौदहा तहसील में
सर्वाधिक है लेकिन मौदहा सीएचसी में सिर्फ पांच मुस्लिम महिलाओं ने आपरेशन
कराया है।
वहीं राठ में सर्वाधिक 132 मुस्लिम महिलाओं ने नसबंदी कराई।
सीएचसी मुस्करा में तीन, नौरंगा में एक, हमीरपुर में सात, कुरारा में चार,
गोहांड में 10 व धगवां पीएचसी में 15 मुस्लिम महिलाओं ने नसबंदी आपरेशन
कराया है।
इसके पीछे मुसलमानों में शिक्षा के प्रति बढ़ता लगाव मुख्य कारण
माना जा रहा है। बुद्धिजीवियों के मुताबिक अब मुसलमानों में यह फिक्र भी है
कि आय के साधन सीमित होने से ज्यादा बच्चों की बेहतर परवरिश नहीं हो पाती
है।
देखा जा रहा है कि परिवार नियोजन के साधनों कंडोम, गर्भ निरोधक
गोलियां, कापर टी (आईयूडी), गर्भ निरोधक सुई, बिना चीरा-बिना टांका नसबंदी
कार्यक्रमों की ओर तेजी से झुकाव हुआ है।
यही कारण है कि जहां 12,525 हिंदू
महिलाओं ने कापर टी को अपनाया तो 19,228 मुस्लिम महिलाओं ने भी कापर टी
लगवाकर छोटा परिवार अपनाने की पहल की है।
मुख्य चिकित्साधिकारी
डा.श्रीराम सोनी ने कहा स्वास्थ्य विभाग परिवार कल्याण कार्यक्रमों की
जानकारी हर किसी को देने का प्रयास कर रहा है। शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र,
सभी में उनके कार्यकर्ता पूरी ताकत से जुटे हैं। संस्थागत प्रसव के साथ
परिवार कल्याण पर पूरा जोर दिया जा रहा है।