अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। बहुचर्चित दि बल्यूट सहकारी सभा में हुए करोड़ों के घपले में वेरिफिकेशन का कार्य पूरा हो गया है। अब शीघ्र ही ऋण मामले की सच्चाई सामने आने वाली है। वेरिफिकेशन का कार्य 17 जुलाई से शुरू हुआ था। सहकारी सभा के कार्यालय में वेरिफिकेशन के लिए पहुंचे 90 फीसदी उपभोक्ताओं ने उनके नाम पर सभा में खोले ऋण खातों को फर्जी बताया। ऑडिट के दौरान सहकारी सभा में 209 ऋण खाते सामने आए हैं। लेकिन करीब 200 लोगों नेे बताया कि सहकारी सभा से आज तक कोई ऋण नहीं लिया है। कुछ लोगों का 45 हजार तो कुछेक का डेढ़ लाख से अधिक का ऋण सामने आया है। इस फर्जी ऋण का पता चलने के बाद लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
पीड़ित लोगों रेखा कुमारी, दुनी चंद, राजकुमार, मान चंद, मदन लाल, प्रेम लाल, सीता राम और ज्योति शर्मा का कहना है कि जब उन्होंने सभा से ऋण लिया ही नहीं तो रिकवरी किस बात की। लोगों ने इस घोटाले में सहकारी सभा के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना मिलीभगत इतना बड़ा घोटाला नहीं हो सकता। इसलिए पुलिस को सहकारी सभा के निरीक्षक से लेकर सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं से भी पूछताछ करनी चाहिए। ऋण मामले में न तो कोई गारंटर है और न ही बैंक डिपोजिट और जमीन गिरवी रखी गई है। औपचारिकताएं पूरी किए बगैर सभा ने लाखों का ऋण कैसे दे दिया।
उधर, जिला प्रशासक एवं सहकारी सभा के निरीक्षक कुलदीप कुमार शर्मा ने कहा कि शिमला से स्पेशल टीम आई हुई है, जो ऑडिट कर रही है। उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों ने ऋण नहीं लिया है, लेकिन उनके नाम से ऋण खाते खोले गए हैं। सारे मामले की जांच की जा रही है। वेरिफिकेशन का कार्य पूरा हो चुका है, शीघ्र ही सारे मामले का खुलासा हो जाएगा।
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शिमला ईपीएफ ऑफिस को लिखी चिट्ठी : कुलदीप शर्मा
प्रशासक कुलदीप शर्मा ने कहा कि सभा के सचिव के ईपीएफ खाते को सीज करने के बारे सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं हमीरपुर ने क्षेत्रीय ईपीएफ कार्यालय शिमला को लिखा है। सभा में गबन के बाद से सचिव अपने परिवार समेत अप्रैल माह से फरार चल रहा है।