करीब 18 वर्ष पहले कोतवाली क्षेत्र के ईदगाह के पास रिटायर्ड फौजी की गोली मारकर हत्या कर हत्यारे उसकी लाइसेंसी बंदूक लूटकर भाग गए थे। बुधवार को इस मामले में विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र शमसुल हक ने दो दोषियों को आजीवन कारावास व 16-16 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
शासकीय अधिवक्ता राकेश सिंह यादव ने बताया कि कुरारा थानाक्षेत्र के झलोखर गांव निवासी संतोष सिंह रिटायर्ड फौजी था। सेवानिवृत्ति के बाद वह कुरारा क्षेत्र के बेरी मौरंग खदान में सुरक्षाकर्मी के रूप में काम करता था।
26 अक्तूबर 2000 की रात करीब आठ बजे कोतवाली क्षेत्र के ब्रम्हा का डेरा निवासी बाबा केवट उर्फ गया प्रसाद, कुरारा थानाक्षेत्र के उमराहट व हाल मुकाम ब्रम्हा का डेरा निवासी बलवान केवट, सुमेरपुर थानाक्षेत्र के देवगांव निवासी चालक सतीश अग्निहोत्री, कुरारा थानाक्षेत्र के झलोखर गांव निवासी बलदेव साहू जीप लेकर उसके घर गए।
वहां संतोष से कहा कि खदान का कैश जमा करने उनके साथ हमीरपुर तक चलना है। इस पर वह लाइसेंसी बंदूक लेकर उनके साथ चला गया। कोतवाली क्षेत्र के ईदगाह के पास पहुंचने पर ये लोग संतोष की गोली मारकर हत्या कर उसकी बंदूक लूटकर भाग गए थे।
उसी रात करीब नौ बजे संतोष का भाई अवधेश सिंह व चाचा का लड़का लल्ला सिंह देवगांव से खेती की बुआई कर दीपावली के त्योहार में घर जा रहे थे। इन लोगों ने आरोपियों को भागते हुए देखा था। मृतक के भाई बालेंद्र सिंह ने थाने में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने मामले की विवेचना की तब बलवान केवट, बाबा केवट उर्फ गया प्रसाद व सतीश अग्निहोत्री आदि के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार किया। मामले की चार्जशीट न्यायालय में पेश की। वहीं मुकदमे के दौरान अभियुक्त बलदेव साहू की मौत हो गई।
मामले की सुनवाई में बुधवार को विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र शमसुल हक ने बलवान केवट व बाबा केवट उर्फ गया प्रसाद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं 16-16 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया। मुकदमे में साक्ष्य के अभाव में सतीश अग्निहोत्री व बलवीर साहू को बरी कर दिया।
रिटायर्ड फौजी की हत्या में दो दोषियों को उम्रकैद
18 साल पहले कोतवाली क्षेत्र के ईदगाह के पास हुई थी घटना
हत्या के बाद लाइसेंसी बंदूक लूटकर भाग गए थे