दस वर्ष पूर्व कोतवाली राठ के चिल्ली गांव में हुई युवक की हत्या के मामले में बुधवार को न्यायालय ने आरोपी चाचा को दस वर्ष कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। एक आरोपी का मुकदमा किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
अपर जिला जज कोर्ट नंबर दो के शासकीय अधिवक्ता आनंद सक्सेना ने बताया कि चिल्ली गांव निवासी गौरीशंकर की दो पत्नी थीं। जिसमें पहली पत्नी के पुत्र हरीसिंह को वह जमीन में हिस्सा नहीं दे रहा था। जिससे दोनों में विवाद था। इसी विवाद को पंचायत द्वारा समाप्त कराने के लिए हरी सिंह की पत्नी रामलली महोबा जिले के महोबकंठ थाना के भुजपुरा गांव निवासी चंद्रशेखर को अपनी ससुराल चिल्ली लिवा लाई। 16 मई 2006 को हरी सिंह पंचायत के लिए गांव में लोगों को बुलाने गया था। काफी देर तक वह नहीं लौटा तो उसकी पत्नी रामलली, ससुर गिरधारी व चंद्रशेखर उसे ढूंढ़ने निकले।
देखा कि बृजभूषण लोधी के घर के पास गौरीशंकर, एक सौतेले भाई और चाचा शिवराम ने हरी सिंह को कुल्हाड़ी से हमला कर घायल कर दिया था। कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। गिरधारी ने इन तीन आरोपियों के साथ आरोपी रामस्वरूप निवासी बिलगांव के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के दौरान गौरीशंकर की मौत हो गई। मुकदमे की सुनवाई कर अपर जिला जज अब्दुल जमील ने रामस्वरूप को दोषमुक्त कर दिया जबकि शिवराम को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।