हमीरपुर। वर्ष 1997 को गणतंत्र दिवस की शाम सुभाष बाजार में हुए नरसंहार से जिला थर्रा गया था। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सजा बरकरार रखने के बाद लोगों को फिर जघन्य वारदात की याद आ गई।
26 जनवरी 1997 की शाम सुभाष बाजार में हमलावरों ने भाजपा नेता राजीव शुक्ला के बड़े भाई राकेश शुक्ला, राजेश शुक्ला, उसके भतीजे गुड्डा, श्रीकांत पांडेय व वेदप्रकाश को गोलियों से भून डाला था। राजीव शुक्ला व रविकांत समेत पांच लोग गोली लगने से घायल हुए थे। मामले में पूर्व विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत 11 लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मुकदमे के ट्रायल के दौरान अशोक सिंह चंदेल सांसद निर्वाचित हुए थे। फरार चल रहे पूर्व सांसद अशोक सिंह चंदेल को जनपद न्यायालय ने भगोड़ा घोषित किया था। बाद में कोर्ट में सरेंडर हुए थे, लेकिन उसी दिन जमानत पर उन्हें रिहा कर दिया था।
इस मामले की जांच के बाद न्यायाधीश आरबी लाल बर्खास्त हुए थे। स्पेशल जज अश्वनी कुमार ने इस मुकदमे की सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर हाईकोर्ट ने मामले की जांच कराई थी। विशेष न्यायाधीश को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। 19 अप्रैल 2019 को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पूर्व सांसद समेत 10 लोगों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के बाद अशोक सिंह चंदेल समेत सभी दोषियों ने 13 मई 2019 को एमएलए कोर्ट में सरेंडर किया था। तब से सभी सलाखों के पीछे हैं।
मृतक राकेश शुक्ला के भाई एडवोकेट राजीव शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने बताया कि सजायाफ्ता पूर्व सांसद आगरा, डब्बू सिंह नैनी, श्याम सिंह, प्रदीप सिंह, रुक्कू फतेहगढ़, साहब सिंह, नसीम बनारस व भान सिंह बरेली जेल में बंद है। पीड़ित पक्ष की ओर से एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा, सोनिया माथुर व उदय प्रकाश यादव ने पैरवी की।
दोषी के अधिवक्ता प्राणेश सिंह ने बताया कि पुराने तीन मामलों बंधक बनाना, शस्त्र निरस्तीकरण व जान माल की धमकी देने के तीन मुकदमों की सुनवाई एमएलए कोर्ट में चल रही है। इसकी सुनवाई शनिवार को होगी। कोर्ट ने पूर्व सांसद को हाजिर होने का आदेश दिया था।