विकास खंड के दो बड़ेे गांवों गहरौली और मुस्करा में सफाई के लिए सिर्फ एक-एक कर्मचारी होने से गंदगी का अंबार है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं व नालियां बजबजा रही हैं। मुस्करा और गहरौली प्रत्येक की आबादी 20 से 25 हजार है। लेकिन आबादी के अनुपात से इन गांवों में सफाई कर्मियों की तैनाती नहीं हुई है। दोनों गांवों में एक-एक सफाई कर्मचारी है। सफाई कर्मचारी स्कूलों की सफाई कर पाता है। बस्ती के भीतर सफाई का समय ही नहीं मिलता। गहरौली और मुस्करा में बस्ती के भीतर व सड़क किनारे कूड़ों के ढेर लगे हैं। नाली व नाले भी जाम पड़े हुए हैं। जगह-जगह नालियों के बजबजाने से संक्रामक बीमारियों का भी डर है। लोगों का कहना है कि डीपीआरओ कार्यालय के भेदभावपूर्ण रवैए से महज पांच हजार आबादी वाले गांव तगारी में तीन सफाई कर्मचारी व अछपुरा बहदीना की चार हजार आबादी में चार कर्मचारियों की तैनाती है, जो लोगाें की समझ से परे है। गहरौली प्रधान राजेंद्र कुमार द्विवेदी एवं मुस्करा प्रधान त्रिभुवन सिंह राजपूत ने डीपीआरओ व जिलाधिकारी को पत्र लिखकर शीघ्र तीन-तीन सफाई कर्मचारी नियुक्त करने की मांग की है। प्रधानों का कहना है कि इन गांवों में कम से कम चार-चार सफाई कर्मचारी होने चाहिए। तभी गांव को स्वच्छ रखा जा सकता है।