हमीरपुर। मवेशियों को संरक्षित करने के मुख्यमंत्री के फरमान को जिम्मेदार नजरअंदाज कर रहे हैं। फसलें बचाने के लिए किसान रात दिन जद्दोजहद में जुटे हैं। गुुरुवार को राज्यपाल के आगमन के दौरान भी शहर में अन्ना मवेशियों का जमावड़ा लगा रहा।
जिले में करीब 37 हजार अन्ना मवेशी हैं। जिन्हें फसल कटने के बाद मार्च माह में उन्हें आश्रय स्थलों से छोड़ दिया गया था। जिनको संरक्षित किए जाने के लिए मुख्यमंत्री ने पिछले जून माह में फरमान जारी किया था। समय से बारिश हो जाने के चलते किसानों ने खरीफ फसलें भी बो ली हैं। वहीं अभी भी काफी किसान मवेशी संरक्षित न होने से फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। जो फसलें जमीं खड़ी हैं, उन्हें मवेशियों से बचाने के लिए किसान रात दिन उनकी रखवाली में जुटा है। बताते चलें कि जिले में कुल 330 पशु आश्रय स्थल संचालित हैं। जिनमें 319 अस्थायी व 11 स्थायी आश्रय स्थल हैं। इनमें करीब 37 हजार मवेशी संरक्षित होने का दावा पशुपालन विभाग कर रहा है। जबकि हकीकत में ज्यादातर गोशालाओं में मवेशी संरक्षित नहीं किए गए। जो रात दिन खेतों में धमाचौकड़ी कर फसलों को चट करने में जुटे हैं।
सुमेरपुर क्षेत्र के पत्योरा गांव निवासी राजेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि तीन बीघे में तिल की फसल बो रखी है। कहा कि अभी तक अन्ना मवेशी संरक्षित नहीं किए गए। जिसके चलते सारा दिन फसलों की रखवाली करनी पड़ती है।
कुरारा क्षेत्र के टोडरपुर गांव निवासी किसान कृष्ण कुमार कुशवाहा ने बताया कि उसने 35 बीघे में धान व 10 बीघे में मूंगफली की फसल बोई है। कहा कि अन्ना मवेशी संरक्षित न होने से दिन रात खेतों में रखवाली करनी पड़ रही है। जो खेतों में घूमकर फसलों को चट कर रहे हैं।
शुक्रवार से अभियान चलाकर सभी अन्ना मवेशियों को संरक्षित कराया जाएगा। जिसके लिए सभी ब्लॉकों को दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कहा कि जो भी लापरवाही करेगा, उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
चंद्रशेखर शुक्ला, सीडीओ