संविदा रोडवेज कर्मचारियो की हड़ताल से यात्री परेशान हुए।
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रोडवेज के संविदा परिचालक मुसाफिरों के लिए परेशानी का सबब बन गए। स्थायी किए जाने की मांग को लेकर परिक्षेत्र के 200 से ज्यादा परिचालक बृहस्पतिवार को लखनऊ में धरना देने पहुंचे हैं जिसकी वजह से अनुबंधित बसों का संचालन ठप हो गया। इससे जहां एक ओर रोडवेज को आर्थिक क्षति हुई वहीं मुसाफिरों को भी बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
परिचालकों के अभाव में सिर्फ निगम की बसों का संचालन होता रहा। सुबह के समय रेलवे बस स्टेशन पर बसों में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच अफरातफरी मची रही। अधिकांश अनुबंधित बसें परिचालक के अभाव में खड़ी रही। घंटों बस में बैठने के बाद यात्रियों को पता चला कि परिचालक नहीं होने की वजह से बस नहीं चलेगी। हालांकि दोपहर बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो गई। रोडवेज प्रबंधन ने काउंटर बुकिंग कर बसों को रवाना करवाया। बसें कम चलने का सबसे ज्यादा फायदा डग्गामार वाहनों को हुआ। मौके का फायदा उठाकर चालकों ने किराया भी बढ़ा दिया।
कुशीनगर देवरिया रूट सर्वाधिक प्रभावित
संविदा परिचालक के नहीं होने की वजह से कुशीनगर और देवरिया जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि लखनऊ कानपुर और दिल्ली के लिए लगातार निगम की बसों का संचालन होता रहा। यात्रियों ने बताया कि रोडवेज अधिकारियों ने सुबह से काउंटर बुकिंग की व्यवस्था नहीं की जिसकी वजह से उनका काफी समय बरबाद हो गया।
निगम का दावा हुआ फेल
पूरे प्रदेश से संविदा परिचालक धरना देने ेबुधवार की रात लखनऊ चले गए थे। बड़ी संख्या में परिचालकों के जाने के बाद निगम प्रशासन ने यह दावा किया था कि वह यात्रियों को परेशान नहीं होने देगा, लेकिन उनका दावा फेल रहा।
यात्रियों को परेशानी न हो इसके लिए काउंटर बुकिंग शुरू करवा दी गई थी। जिन बसों में परिचालक नहीं थे वहां दूसरे रूट के परिचालक को भेजा गया।
सुग्रीव कुमार राय, क्षेत्रीय प्रबंधक