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नैनो टेक्नोलॉजी की खूबियों ने हतप्रभ किया

Thu, 10 Mar 2016 08:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञान विभाग में शुरू हुआ राष्ट्रीय सेमिनार - फोटो : shivharsh
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञान विभाग में बृहस्पतिवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ। क्रियाशील पदार्थों पर केंद्रित सेमिनार के पहले दिन नैनो टेक्नोलॉजी की खूबियों पर हुई चर्चा ने छात्रों और शिक्षकों को हतप्रभ कर दिया। बीएचयू से आए नैनो टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ पद्मश्री वैज्ञानिक प्रो. ओंकार नाथ श्रीवास्तव के उद्घाटन संबोधन सुनकर लोग नैनो टेक्नोलॉजी से जुड़े कई नए तथ्यों से समृद्ध हुए।
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प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि नैनो पदार्थों के विशिष्ट अभिलाक्षणिक गुणों के द्वारा नवीनतम अनुप्रयोग संभव हैं। सोना, चांदी आदि को नैनो साइज में बदलकर उनके भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों को क्रियाशील किया जा सकता है। प्रो. श्रीवास्तव के मुताबिक नैनो टेक्नोलॉजी वह पद्धति है, जिसमें पिन के नोक के बराबर जगह में लिखी जा सकती है। कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि इस प्रकार के क्रियाशील पदार्थ कैंसर के इलाज में ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं।

सेमिनार के दूसरे सत्र में बीएचयू के ही प्रो. यशवंत सिंह ने क्रियाशील पदार्थों की समानता पर व्याख्यान दिया। प्रो. एसएन ठाकु़र ने प्रकाश और उनके विशिष्ट गुणों को मानव को उन्नत बनाने से लेकर अंतरिक्ष, खगोल, भूगर्भ एवं चिकित्सा क्षेत्रों में उपयोगिता को रेखांकित किया। तृतीय सत्र में आठ शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। संचालन डॉ. रवि शंकर सिंह और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मिहिर रायचौधरी ने किया। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. सुग्रीव तिवारी, प्रो. एसके सेनगुप्ता, प्रो. एचएस शुक्ला, प्रो. जयप्रकाश, प्रो. एलएन त्रिपाठी, प्रो. माहेश्वर मिश्र, प्रो. जेएन राय आदि मौजूद रहे। 
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नैनो टेक्नोलॉजी से बनाए जाएंगे मकान : प्रो. ओंकार

सेमिनार में हिस्सा लेने आए शांति स्वरूप भट्नागर पुरस्कार से सम्मानित पद्मश्री वैज्ञानिक प्रो. ओंकार नाथ ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में नैनो टेक्नोलॉजी की संभावनाओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी की पैठ धीरे-धीरे जीवन के हर क्षेत्र में बन रही है। पिछले दिनों आए भूकंप की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वह दिन दूर नहीं जब कार्बन नैनो ट्यूब के इस्तेमाल से मकान बनाए जाएंगे। इससे मकान हिलेंगे जरूर, मगर ढहेंगे नहीं। उन्होंने बताया कि कार्बन नैनो ट्यूब और कार्बन फ्री उर्जा के इस्तेमाल की शुरुआत हो चुकी है। जापान के लोग इसी टेक्नोलॉजी से अपने घर को भूंकप से सुरक्षित कर सके हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में इसकी उपयोगिता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसी भी रोग की संधि स्थल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और उसे वहीं समाप्त भी किया जा सकता है। इसी तरह ऊर्जा क्षेत्र मेें इस तकनीकी के जरिए हाइड्रोजन को कोयले और पेट्रोलियम पदार्थों के विकल्प में उतारा जा रहा है। इससे न केवल प्रदूषण की समस्या सुलझेगी, बल्कि कोयले और पेट्रोलियम पदार्थों के खत्म हो रहे भंडार की चिंता से भी निजात मिलेगी। उन्होंने बताया कि पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि की चिंता ने वैज्ञानिकों को नैनो टेक्नोलॉजी की ओर रुख करने के लिए मजबूर कर दिया है। 
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