सराफा मंडल के संरक्षक, अध्यक्ष ने की संयुक्त प्रेस वार्ता
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स्वर्ण और डायमंड के आभूषण पर एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी पूरे सेल वैल्यू पर लागू होगी, जिससे आभूषण की कीमत व मजदूरी सर्विस टैक्स के दायरे में आ जाएगी। यह व्यवस्था लागू होने पर कारीगर द्वारा बनाए गए सभी आभूषणों पर व्यापारियों को एक्साइज ड्यूटी देना पड़ेगा। यदि कोई व्यापारी किसी ऐसे व्यापारी से जेवर लेता है, जो पहले से ही एक्साइज देता है तो उस पर यह टैक्स नहीं लगेगा। इससे हर सर्राफ को अलग-अलग स्टॉक रजिस्टर रखना पड़ेगा।
यह बातें सर्राफा मंडल गोरखपुर के संरक्षक अतुल सर्राफ, अध्यक्ष शरदचंद्र अग्रहरी व पीडी जैन ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि ऑर्डर से बनवाए गए जेवर का डेली स्टॉक रजिस्टर बनाना होगा, जो विभाग द्वारा जारी नियमावली के अनुसार होगी। अगर कोई सराफ बिल हाथ से बनाएगा तो उसे पूरे बिल बुक पर विभाग की मुहर लगवानी होगी। ऐसा गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू होने पर किया जाता था। इस कानून के लागू होने से गोल्ड कंट्रोल एक्ट की वापसी होनी तय है। प्रत्येक कारीगर को विभाग द्वारा मुहर लगाकर रजिस्टर रखना होगा, जिस पर सोना किसने दिया, किस लिए दिया, कितना जेवर बना कर दिया व कितनी मजदूरी ली आदि का ब्योरा दर्ज करना होगा।
सरकार बीआईएस कोलैबोरेट करके यूआईडी मार्क जेवर प्रयोग में लाना चाहती है। इससे स्वर्ण व्यवसाय का मूल स्वरूप ही बदल जाएगा। क्योंकि एक्साइज ड्यूटी निर्माता पर लगेगी, जिससे पूरा जॉब वर्क सर्विस टैक्स के दायरे में आ जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र्र सरकार ने पहले भी वर्ष 2005 में एक्साइज ड्यूटी लगाई थी। तीन दिनों की हड़ताल के बाद इसे वापस ले लिया गया था। वर्ष 2012 में भी एक्साइज ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन 22 दिनों की हड़ताल के बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया था। एक बार फि र एक्साइज ड्यूटी लागू की गयी है, लेकिन संघर्ष व एकता के बल पर इसे फिर से वापस कराया जाएगा।